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Cyber Crime: जामताड़ा में ट्रेनिंग, 64 किमी दूर बंगाल ठिकाना, चचेरे भाइयों ने की 50 लाख की ठगी; हैक किया फोन

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 11 Mar 2026 11:31 AM IST
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सार

Varanasi News: एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक किया गया और एक्सेस कंट्रोल में लेकर 8.38 लाख रुपये की ठगी की गई थी। एक जनवरी को भुक्तभोगी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 

Training in Jamtara base in Bengal cousins defrauded man 50 lakk rupees hacked his phone
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi Crime: साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने झारखंड के जामताड़ा में ट्रेनिंग लेकर 64 किमी दूर पश्चिम बंगाल के अंडाल में अपना ठिकाना बना लिया था। 

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गिरोह ने एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की तकनीक से वाराणसी के रामनगर निवासी ईंट कारोबारी अनूप गुप्ता से 8.38 लाख रुपये की ठगी की थी। सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पुलिस ने दो साइबर ठगों को पश्चिम बंगाल के अंडाल से गिरफ्तार किया। 
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आरोपियों की पहचान नागेश्वर मंडल और अक्षय मंडल निवासी अंडाल, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई। दोनों चचेरे भाई हैं। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों ने पांच साल के अंदर 50 लाख रुपये की साइबर ठगी की। 

दोनों साइबर अपराधियों के निशाने पर लगभग 100 लोग थे। दोनों टेलीग्राम बॉट से मेसेज भेजते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि रामनगर के मछरहट्टा निवासी ईंट कारोबारी अनूप गुप्ता को निशाना बनाया गया था। 

ठगी की रकम से 25 लाख में खरीदा मकान
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य पहले झारखंड के जामताड़ा में साइबर ठगी की ट्रेनिंग ले चुके थे। वहां उनके खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज होने के कारण उन्होंने जामताड़ा, झारखंड छोड़ दिया और जामताड़ा से करीब 64 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के अंडाल को ठिकाना बना लिया।

ठगी से अर्जित 50 लाख रुपये की रकम से आरोपियों ने करीब 25 लाख रुपये का मकान खरीदा और नेटवर्क चलाने के लिए 10 मोबाइल फोन भी खरीदे थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और म्यूल खातों की जांच कर रही है। आगे संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

दोनों जिसे निशाना बनाना होता, उसे ट्रोजन और एसएमएस फॉरवर्डर आधारित एपीके फाइल भेजते थे। जैसे ही कोई उस फाइल को डाउनलोड करता, मोबाइल हैक हो जाता और उसके बैंक से जुड़े ओटीपी व अन्य जानकारी गिरोह तक पहुंच जाती थी। इसके बाद ठग म्यूल खातों के जरिये रकम निकाल लेते थे। - विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर अपराध

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