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IIT BHU: आईआईटी की तकनीक, बिना रेडिएशन के अल्जाइमर टेस्ट, खोजी गई थेरानॉस्टिक पद्धति; जानें खासियत

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 11 Mar 2026 11:09 AM IST
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सार

IIT BHU: अल्जाइमर धीरे-धीरे बढ़ने वाला गंभीर न्यूरोलॉजिकल रोग है, जो याददाश्त, तर्क क्षमता और डेली रूटीन को प्रभावित करता है। विश्वभर में डिमेंशिया का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मस्तिष्क में हानिकारक प्रोटीन एमाइलॉयड का जमाव रोग के लक्षण दिखाई देने से कई वर्षों पहले ही शुरू हो जाता है।

IIT technology Alzheimer test without radiation theranostic method discovered learn about its specialty
अल्जाइमर। - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

Alzheimer: आईआईटी बीएचयू में बिना रेडिएशन के अल्जाइमर टेस्ट की तकनीक तैयार की गई है। अल्जाइमर के इलाज के लिए नई थेरानॉस्टिक पद्धति खोजी गई है जो कि रोग के शुरुआती स्टेज में ही उसकी पहचान कर त्वरित इलाज में मदद करेगी। न तो महंगी जांचें करानी होंगी और न ही किसी रेडिएशन का खतरा होगा। आमतौर पर पीईटी और एमआरआई स्कैन सभी के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। जबकि खून आधारित जांच अभी विकास के चरण में हैं। 

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ऐसे में आईआईटी में कम लागत वाली और ज्यादा सटीक जांच का विकल्प तैयार किया गया है। फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. ज्ञान प्रकाश मोदी, उनके शोधार्थी हिमांशु राय और शोध दल ने नियर-इन्फ्रारेड फ्लोरेसेंट आधारित थेरानॉस्टिक प्रोब विकसित किया है। 
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ये प्रोब विशेष लाइट में चमकते हैं और मस्तिष्क में एमाइलॉयड प्लाक्स यानी कि मौजूद हानिकारक प्रोटीन के जमाव का पता लगा सकते हैं। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। 

एम्स और आईसीएमआर का समर्थन
इस रिसर्च में राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान की डॉ. सारिका गुप्ता, एम्स नई दिल्ली के डॉ. सरोज कुमार, डॉ. साईराम कृष्णमूर्ति, बीएचयू के जैव रसायन विभाग के डॉ. श्रीकृष्णा सरिपेला और आईआईटी बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. वी. रमणाथन शामिल रहे। इस शोध का वित्तीय सहयोग भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन नई दिल्ली की ओर से किया गया। 

न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से निपटने का बड़ा कदम
निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह शोध हमारे समय की सबसे चुनौतीपूर्ण न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने पूरी शोध टीम और सहयोगी संस्थानों को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई दी। कहा कि ऐसे प्रभावशाली शोध समाज के लिए सुलभ और किफायती स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के हमारे संकल्प को मजबूत करते हैं।

सिंगापुर-मलयेशिया में बीएचयू के प्रोफेसर आयोजन सचिव
वाराणसी। सिंगापुर और मलयेशिया में दक्षिण एशियाई समाजशास्त्रीय परिषद की ओर से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सचिव बीएचयू के समाजशास्त्री प्रो. आरएन त्रिपाठी को बनाया गया है। इस सम्मेलन में विज्ञान, तकनीक और समाज को लेकर 13 मार्च तक संवाद होंगे। कार्यक्रम के दूसरे आयेाजन सचिव आंबेडकर विवि लखनऊ के प्रो. बिभूति भूषण मलिक हैं। 

इस सम्मेलन में डिजिटल परिवर्तन, आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल, एआई, जलवायु संकट, ज्ञान और सत्ता के संबंध पर मंथन हुआ। प्रो. आरएन त्रिपाठी ने विचार रखे। रोमा ट्रे विवि, रोम के समाजशास्त्री प्रो. रॉबर्टो सिप्रियानी, पेंसिल्वेनिया से धर्म, दर्शनशास्त्री प्रो. जेफरी डी. लॉन्ग, कार्ल डब्ल्यू. जिग्लर, मिनेसोटा से डॉ. अबिन ओझा, मॉरीशस विश्वविद्यालय से समाजशास्त्री प्रो. राजेन सुनतू माॅरिसस और बीएचयू प्रो. डीआर साहू मौजूद रहे। 

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