International Dance Day: तेजी से विकसित हो रहा नृत्य का क्षेत्र, गंभीर चुनौतियां भी; सुनें कलाकारों की
Varanasi News: अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस पर सभी कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्म-अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि युवा सही दिशा में प्रयास करें और उन्हें उचित मंच व सहयोग मिले, तो नृत्य के क्षेत्र में उनका भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल है।
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International Dance Day: अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के अवसर पर देशभर की प्रमुख नृत्यांगनाओं और कलाकारों ने नृत्य के बदलते स्वरूप, युवाओं की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। सभी ने एक स्वर में कहा कि नृत्य का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसके साथ कई गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कलाकारों ने युवाओं को संतुलन, अनुशासन और परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया।
मुंबई की कथक नृत्यांगना डॉ. अमृता मोहन ने कहा कि आज के युवा नृत्य को केवल शौक नहीं, बल्कि एक पेशे के रूप में देख रहे हैं। पहले जहां यह केवल परंपरा तक सीमित था, वहीं अब इसमें रोजगार और पहचान के अवसर भी बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि नए मंचों, विदेशी प्रशिक्षण और नई प्रस्तुतियों ने नृत्य को व्यापक बनाया है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि अभी भी पर्याप्त मंच और स्थायी रोजगार के अवसरों की कमी है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी पढ़ाई के साथ नृत्य को आगे बढ़ाएं, ताकि जीवन में संतुलन बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि नृत्य में बढ़ते बदलाव के कारण पारंपरिक स्वरूप कमजोर हो रहा है, जिसे बचाने की जरूरत है।
कथक डांसर डॉ. पूजा चौधरी ने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में युवाओं का उत्साह सराहनीय है। आज के युवा अपनी कला को लेकर गंभीर हैं और नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नृत्य अब समाज में सम्मानजनक पेशा बनता जा रहा है, लेकिन इसके लिए मजबूत संरचना और संस्थागत सहयोग जरूरी है। उन्होंने महसूस किया कि युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन की कमी है। वरिष्ठ कलाकारों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सही दिशा दिखाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय नृत्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, लेकिन मूल भाव और शास्त्रीयता को बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
भरत नाट्यम करने वाली डॉ. अल्का गिरी ने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन उन्हें धैर्य और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रसिद्धि जल्दी मिल सकती है, लेकिन स्थायी पहचान के लिए कठोर साधना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि नृत्य के क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे युवा असमंजस में रहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और सांस्कृतिक संस्थाएं मिलकर कलाकारों के लिए बेहतर मंच तैयार करें। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिकता के नाम पर नृत्य की आत्मा से समझौता किया जा रहा है।
सीनियर कथक नृत्यांगना संगीता सिन्हा ने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युवा अपनी कला के माध्यम से समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अवसरों की कमी और प्रतिस्पर्धा के कारण कई प्रतिभाएं पीछे रह जाती हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे निरंतर अभ्यास और समर्पण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय नृत्य में जो बदलाव आ रहे हैं, उनमें संतुलन जरूरी है, ताकि उसकी मूल भावना बनी रहे।
सीनियर कथक नृत्यांगना सरला नारायण सिंह ने कहा कि नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि साधना है। उन्होंने कहा कि आज के युवा इसे तेजी से अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें धैर्य की कमी है। उन्होंने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक नृत्य शैलियों को संरक्षित करना समय की मांग है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करें और अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
युवा कथक डांसर उर्वशी श्रीवास्तव ने कहा कि नृत्य आज के समय में अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बन गया है। युवाओं के लिए इसमें अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए सही दिशा और मार्गदर्शन जरूरी है। उन्होंने कहा कि मंचों और रोजगार के अवसरों की कमी युवाओं के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि नृत्य में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे धैर्य और अनुशासन के साथ अपनी कला को निखारें।
युवा कथक नर्तक आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास ने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में युवाओं का रुझान बढ़ रहा है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज के युवा अपनी कला के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सही मंच और अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का अधिक आयोजन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नृत्य में हो रहे बदलाव को समझना जरूरी है, लेकिन उसकी मूल आत्मा को बचाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली ने कहा कि नृत्य का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इसके लिए संगठित प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि नृत्य में हो रहे बदलाव को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए, लेकिन परंपरा का सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें।
कथक डांसर वसुंधरा शर्मा ने कहा कि नृत्य के क्षेत्र में आज कई नए अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन उनके साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी कला के साथ-साथ शिक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नृत्य में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी पहचान बनाना कठिन हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नृत्य की मूल आत्मा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे धैर्य, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ें।
