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Kharmas 2026: नवरात्र में करें मंगल कार्य फिर 21 दिन पूर्ण विराम, थम जाएगी बैंज-बाजा व शहनाई की धुन
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 10 Mar 2026 05:06 PM IST
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सार
Varanasi News: 14 मार्च को सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद खरमास शुरू हो जाएगा। ऐसे में नवरात्र में मंगल कार्य कर सकेंगे फिर 21 दिन पूर्ण विराम लग जाएगा।
खरमास 2026
- फोटो : अमरउजाला
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विस्तार
सूर्य देव एक बार फिर अपनी चाल बदलकर 14 मार्च को मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास के 31 दिनों में देवी का प्रभाव दिखेगा। लोग 19 मार्च से शुरू हो रहे नवरात्र में विवाह छोड़ अन्य मांगलिक कार्य कर सकते हैं। बाकी 22 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। गृह प्रवेश, अन्नप्रासन, शादियां आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। हालांकि, 14 अप्रैल के बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे जो तीन माह से ज्यादा समय तक होंगे।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में दो बार खरमास लगता है। इसमें सूर्य भगवान अपने गुरुदेव की राशि धनु और मीन राशि में जाते हैं। 14 मार्च को सूर्य देव कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे और खरमास शुरू हो जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया ने 14 मार्च की रात या 15 मार्च को भोर में 3:07 बजे सूर्य भगवान गुरु की राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसके बाद खरमास शुरू हो जाएगा।
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14 अप्रैल को खरमास पर विराम लगेगा। क्योंकि, सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जो सूर्य देव की उच्च राशि होती है, जिससे वैवाहिक सहित सभी तरह के मांगलिक कार्य पुन: शुरू हो जाएंगे। 20 जुलाई तक तीन माह से अधिक समय तक लगन रहेगा।
नवरात्र में ये होंगे मांगलिक कार्य
देवी की अराधना का पर्व नवरात्र 19 से 27 मार्च तक चलेगा। प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस दौरान लग्न के मुहूर्त नहीं बनेंगे। इसलिए शादियां नहीं होंगी। बाकी मांगलिक कार्य होंगे। इसमें यज्ञोपवीत संस्कार, मुंडन, अन्नप्राशन, दुकान का उद्घाटन आदि मंगल कार्य होंगे। साथ ही गया तीर्थ पर श्राद्ध कर्म पर खरमास का कोई बंधन नहीं होता है।
25 जुलाई से चातुर्मास
देवशयनी एकादशी यानी चातुर्मास शुरू हो जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष हरिशयनी एकादशी 25 जुलाई को है, जो कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर तक चलेगा। इस बीच एक बार फिर चार माह से अधिक समय तक मांगलिक कार्य पर विराम लगा रहेगा। शादी सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
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अप्रैल, मई और जून में ज्यादा लगन
मार्च में 2, 3, 4, 8, 9, 11 व 12, अप्रैल में 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 व 29, मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 व 14, जून में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29 और जुलाई में 1, 6, 7, 11 व 12 को विवाह होंगे। चातुर्मास के बाद नवंबर में 20, 25 और 26 तथा दिसंबर में 3 व 4 को ही लग्न है।
25 जुलाई से चातुर्मास
देवशयनी एकादशी यानी चातुर्मास शुरू हो जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष हरिशयनी एकादशी 25 जुलाई को है, जो कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर तक चलेगा। इस बीच एक बार फिर चार माह से अधिक समय तक मांगलिक कार्य पर विराम लगा रहेगा। शादी सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
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अप्रैल, मई और जून में ज्यादा लगन
मार्च में 2, 3, 4, 8, 9, 11 व 12, अप्रैल में 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 व 29, मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 व 14, जून में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29 और जुलाई में 1, 6, 7, 11 व 12 को विवाह होंगे। चातुर्मास के बाद नवंबर में 20, 25 और 26 तथा दिसंबर में 3 व 4 को ही लग्न है।
