UP News: फोन पर बुकिंग... ट्रेनों की फॉल्स सीलिंग में छिपाकर बिहार ले जाते हैं शराब, महिलाओं ने किया ये दावा
बलिया से ट्रेनों की फॉल्स सीलिंग में छिपाकर शराब बिहाल ले जाया जा रहा है। स्टिंग ऑपरेशन में महिला तस्कर ने दावा कि शराब की खेप के आधार पर थानों को हर महीने 10 से 30 हजार रुपये पहुंचाए जाते हैं। सख्ती पर पुलिस पकड़ती है, मगर बाद में छोड़ देती है।
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बिहार में शराबबंदी के बावजूद हर दिन ट्रेनों के जरिये 300 से ज्यादा पेटी शराब बिहार पहुंचाई जा रही है। बृहस्पतिवार को हमारी टीम के स्टिंग ऑपरेशन में ट्रेनों से शराब तस्करी के खेल का खुलासा हुआ। एक महिला तस्कर ने दावा किया कि बिहार तक शराब की खेप पहुंचाने का नेटवर्क पुलिस और कुछ कोच अटेंडेंट की मिलीभगत से चल रहा है। कुछ गोदाम संचालक और कारोबारी फोन पर ऑर्डर लेकर शराब उपलब्ध कराते हैं। बिहार में यही शराब डेढ़ से दो गुना कीमत पर बेची जाती है। शराब की खेप के आधार पर संबंधित थानों को हर महीने 10 से 30 हजार रुपये पहुंचाए जाते हैं।
महिला तस्कर का कहना था कि रुपये देने के बाद भी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बोतलों को ट्रेनों के शौचालय की फॉल्स सीलिंग और अन्य गुप्त स्थानों में छिपाकर ले जाते हैं। इस काम में ट्रेन के कुछ कोच अटेंडेंट भी पैसे लेकर सहयोग करते हैं। रेलवे स्टेशन के आसपास की कुछ दुकानों पर शराब की बोतलें पहले से पैक करके दी जाती हैं। फिर प्लेटफॉर्म और ट्रेन तक पहुंचाने में कई लोग मदद करते हैं। महिला तस्कर का दावा है कि जांच न होने के कारण ट्रेन सबसे सुरक्षित है।
तस्करी में बिहार की कई महिलाएं और युवक शामिल हैं, जो शराब की खेप दरभंगा समेत अन्य जिलों तक पहुंचाते हैं। महिला तस्कर का कहना था, इसमें ज्यादा मेहनत नहीं है, पैसा भी ठीकठाक मिल जाता है। पुलिस पकड़ती है लेकिन बाद में छोड़ भी देती है।
बिहार जाने वाली ट्रेनें शराब तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित माध्यम बन गई हैं। बलिया रेलवे स्टेशन के अलावा बांसडीह रोड, सहतवार, सुरेमनपुर से ट्रेनों में शराब लोड की जाती है। तस्कर ट्रॉली-पिठ्ठू बैग और झोलों में शराब रखकर ट्रेनों में सवार होते हैं। रोजाना विभिन्न ट्रेनों से 300 पेटी से ज्यादा शराब बिहार पहुंचाई जा रही है। इस खेल में कुछ कोच अटेंडेंट की संलिप्तता रहती है, जो ट्रॉली बैग को कोच के सुरक्षित हिस्सों में छिपा देते हैं। तस्करी में बिहार की महिलाएं और युवतियां शामिल हैं। रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद शराब तस्करी नहीं रुक रही है।
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बलिया रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म नंबर 3 - सुबह 08:00 बजे, सियालदह एक्सप्रेस
शौचालय की फॉल्स सीलिंग में छिपाई जा रही थी खेप, गेट पर थीं महिला तस्कर: प्लेटफॉर्म पर सियालदह एक्सप्रेस खड़ी थी। स्लीपर कोच (एस-2) के शौचालय में एक युवक फॉल्स सीलिंग के प्लास्टिक पैनल को हटाकर उसके भीतर शराब की बोतलें रख रहा था। उसने शौचालय में दो पेटी शराब छिपाई। टीम को देखते ही उसने दरवाजा बंद कर लिया और करीब आधे घंटे तक अंदर ही रहा। उसके पास दो बोरियों में 10 पेटी से ज्यादा शराब थी। गेट पर उसकी मदद में दो महिलाएं थीं, जो आने-जाने वालों पर नजर रख रही थीं। तस्करों ने पांच अलग-अलग बोगियों के शौचालय की फॉल्स सीलिंग में शराब छिपाई थी। ट्रेन सहतवार में रुकी तो चार और युवक शराब से भरा ट्रॉली बैग लेकर ट्रेन में सवार हो गए। दो महिलाएं भी शराब की खेप लेकर जनरल बोगी में चढ़ीं। इस तरह से सियालदह के अलावा बलिया-पाटलीपुत्र, गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस, स्पेशल ट्रेनों से भारी मात्रा में शराब की खेप बिहार के समस्तीपुर व उसके आगे तक पहुंचाई जा रही है।
अमृतसर-जयनगर स्पेशल ट्रेन... पुलिस के सामने एसी कोच में रखा शराब से भरा बैग
सहतवार रेलवे स्टेशन पर दोपहर 2:53 बजे अमृतसर-जयनगर स्पेशल (04652) निर्धारित समय सुबह 10:53 बजे से तीन घंटा लेट पहुंची। पुल के पास पहले से छह युवक शराब और बीयर से भरे चार बैग व दो झोले लेकर खड़े थे। ट्रेन आने पर थर्ड एसी के बी-2 कोच में सवार हुए, जबकि स्टेशन पर तीन पुलिसकर्मी ड्यूटी कर रहे थे, किसी ने उनकी जांच नहीं की। इसी बीच एक पुलिसकर्मी ने कुछ इशारा किया। उसके बाद पुलिसकर्मी ट्रेन के साथ सेल्फी लेने लगे। हमारी टीम ने एक तस्कर को टोका तो बड़ा पिट्ठू बैग लिए युवक गेट के अंदर बैग फेंककर दूसरे बोगी में भाग गया। वहां मौजूद उसका साथी बैग उठाकर इधर-उधर हो गया। टीम को वीडियो बनाते देख कर तस्करों ने विराेध भी किया।
बांसडीह रोड रेलवे स्टेशन के पास अंग्रेजी शराब की दुकान है। पाटलीपुत्र व अन्य पैसेंजर ट्रेनों से कई महिलाएं व युवतियां वहां पहुंच जाती हैं। इनकी उम्र 18 से लेकर 50 साल से ज्यादा की है। इसके बाद शराब की दुकान खुलने का इंतजार करती हैं। दुकान खुलने के बाद शराब की बोतलों को झोले और गठरी में रखकर स्टेशन पर पहुंचती हैं। शराब की बोतलें ट्रेन में रखकर रवाना हो जाती हैं। कुछ लोग इनकी निगरानी भी करते हैं।
अधिकारी बोले
अभियान चलाकर शराब की धरपकड़ होती है। गोरखपुर से स्पेशल टीम धरपकड़ कर रही है। बिहार बॉर्डर के स्टेशनों पर लंबे समय तक एक जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की जाती है। प्लेटफॉर्म व स्टेशन पर जांच की जाती है। पुलिसकर्मी की संलिप्तता मिलने पर कार्रवाई भी होती है। -सविरत्न गौतम, सीओ जीआरपी बलिया
शराब तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। बॉर्डर क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। गोपनीय सूचनाएं मिलने पर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्टेशनों के आसपास की शराब की दुकानों पर पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई है। -संजय वर्मा, एएसपी दक्षिणी