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Varanasi News: मैं जिंदा हूं... का बोर्ड गले में लटकाकर नामांकन को पहुंचा प्रत्याशी; जानें- क्यों किया ऐसा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Wed, 08 May 2024 11:51 PM IST
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सार
Varanasi News: गले में मैं जिंदा हूं... को बोर्ड गले में लटका कर कलेक्ट्रेट में नामांकन करने पहुंचे इस शख्स को हर कोई देख रहा था। हालांकि उसे गेट पर ही रोक लिया गया।
संतोष मूरत सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी के छितौनी निवासी संतोष मूरत सिंह गले में मैं जिंदा हूं... का बैनर लटकाए, हाथ में नामांकन फॉर्म और 25 हजार रुपये शुल्क के साथ बुधवार को कचहरी पहुंचे। लेकिन, अफसरों ने उन्हें मौके पर ही रोक दिया। इस पर वह कचहरी गेट पर ही धरने पर बैठ गए। कहा कि राजस्व अभिलेखों में उन्हें प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया है। खुद को जिंदा साबित करने के लिए चुनाव लड़ने आए हैं।
संतोष 20 वर्षों से चुनाव लड़ रहे हैं। 2012 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। 2014 और 2019 में वाराणसी सीट से लोकसभा चुनाव में नामांकन किया, लेकिन सभी चुनावों का पर्चा खारिज हो गया। संतोष मूरत ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार, उनकी मौत 2003 में मुंबई में ट्रेन में हुए बम धमाके में हो चुकी है। फर्जी तरीके से बने मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर उनके ही कुछ लोगों ने उनकी साढ़े बारह एकड़ भूमि अपने नाम कराकर बेच भी दी। कई बार तो पुलिस जेल भेज चुकी है।
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संतोष 20 वर्षों से चुनाव लड़ रहे हैं। 2012 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। 2014 और 2019 में वाराणसी सीट से लोकसभा चुनाव में नामांकन किया, लेकिन सभी चुनावों का पर्चा खारिज हो गया। संतोष मूरत ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार, उनकी मौत 2003 में मुंबई में ट्रेन में हुए बम धमाके में हो चुकी है। फर्जी तरीके से बने मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर उनके ही कुछ लोगों ने उनकी साढ़े बारह एकड़ भूमि अपने नाम कराकर बेच भी दी। कई बार तो पुलिस जेल भेज चुकी है।