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रमजान: बनारस की दो मस्जिदों में 30 दिन एतिकाफ, बाकी में 10 दिन; बुजुर्गों के साथ युवा भी करते हैं दुआएं

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 11 Mar 2026 12:31 PM IST
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सार

Ramadan: मुकद्दस रमजान को लेकर शहर के प्रमुख मस्जिदों पर रोजा इफ्तार किए जा रहे हैं। अकीदतमंदों का जुटान सुबह-शाम यहां पर हो रहा है। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं।

Ramadan Itikaaf in two mosques in Varanasi 10 days in others young people pray alongside elderly
धरहरा मस्जिद में रोजा इफ्तार करते लोग। - फोटो : संवाद
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विस्तार

मुकद्दस रमजान के आखिरी अशरे में गांव से लेकर शहर तक की मस्जिदों में एतिकाफ की इबादत शुरू हो गई। मगरिब की अजान के साथ इबादतगुजार मस्जिदों में दाखिल हो गए और अल्लाह की इबादत में मशगूल हो गए। अब वे 10 दिनों बाद यानी ईद के चांद के दीदार के बाद ही मस्जिदों से बाहर आएंगे। वहीं, शहर में दो ऐसी मस्जिदें हैं, जहां पूरे रमजान भर लोग ऐतकाफ पर बैठते हैं। 

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रमजान में मोमिनीन पाकिजगी के साथ अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं। रमजान का आखिरी अशरा खास होता है। इसमें शब-ए-कद्र की इबादत होती है। जहन्नुम से निजात के लिए दुआएं की जाती हैं। इसलिए ऐतकाफ खास होता है। 

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शब-ए-कद्र की रात में इबादत होती है कुबूल
तीसरा अशरे को जहन्नुम की आग से निजात दिलाने वाला कहा जाता है। इस अशरे में की गई इबादत के बदले अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर उन्हें जहन्नुम की आग से निजात दिलाता है। इसी अशरे में एक रात शब-ए-कद्र की होती है। इसलिए लोग पूरी रात जागकर इबादत करते हैं। 

शब-ए-कद्र में इबादत का सवाब एक हजार रातों की इबादत के बराबर होता है। मोहल्लों के खैर व बरकत के लिए एतिकाफ करना सुन्न्त है। बनारस के कमच्छा क्षेत्र के कंकड़िया बीर मस्जिद और मस्जिद लोहता में 40 से अधिक इबादतगुजार एतिकाफ पर बैठे हैं। यहां छह साल से पूरे रमजान भर लोग एतिकाफ पर बैठते हैं। 

सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय
देश की पहली महिला अध्यापिका और नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि मंगलवार को कनेरी मोहन सराय स्थित अपना दल (एस) पार्टी के जिला कार्यालय पर मनाई गई। 

बतौर मुख्य अतिथि रोहनिया विधायक डॉक्टर सुनील पटेल ने पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधायक ने सावित्रीबाई फुले के सामाजिक योगदान, विशेषकर महिला शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक कार्यों को याद कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दिलाया। इसके बाद विधानसभा स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक हुई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सचिव व रोहनिया विधानसभा प्रभारी मेघनाथ पटेल, जिलाध्यक्ष राजेंद्र पटेल, रोहनिया विधानसभा अध्यक्ष बसंत लाल पटेल मौजूद रहे।

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