बाबा की नगरी में आस्था की त्रिवेणी: रविदास जयंती पर चार लाख लोगों ने की गुरु बंदगी, जुटे 500 संत; पुलिस सतर्क
धार्मिक नगरी काशी में इन दिनों साधु-संन्यासियों के साथ भक्तों का भी जुटान हो रहा है। गंगा घाटों पर प्रतिदिन नागा साधु स्नान कर जप-तप में लीन हैं। भीड़ को लेकर पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड में है।
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भगवान शिव की नगरी काशी में बुधवार को आस्था की त्रिवेणी बही। रविदास जयंती पर चार लाख लोगों ने सीर गोवर्धन में संगत की तो माघ पूर्णिमा पर आठ लाख श्रद्धालुओं ने गंगा के 84 घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। वहीं, महाकुंभ के पलट प्रवाह से काशी विश्वनाथ धाम में भी 8 लाख लोगों ने दर्शन किए। इसके अलावा जूना अखाड़े के साधु-संतों ने पेशवाई निकाली। इसमें 500 संत शामिल हुए।
एक किमी लंबी कतार, चार लाख संगत ने की गुरु बंदगी
भगवान शिव की नगरी काशी बुधवार को संत शिरोमणि रविदास की 648वीं जयंती पर जय गुरुदेव... के जयकारे और अमृतवाणी से गूंजती रही। संत रविदास का गांव सीर गुरु भक्ति में लीन रहा। मन में गुरुभक्ति रमाए रैदासियों ने गुरु के चरणों में बंदगी अर्पित की।
मंदिर में दर्शन के लिए रेला लगा रहा। मंदिर के दोनों तरफ एक किलोमीटर लंबी कतार लगी थी। प्रशासन के अनुसार सुबह से लेकर रात तक चार लाख से अधिक संगत ने संत रविदास के दर्शन किए।
संत निरंजन दास महाराज ने रविदासिया धर्म ध्वजा फहराने के बाद ग्रीस के अनुयायी की ओर से भेंट किया गया सोने का पानी का चढ़ा निशान ध्वज मंदिर में लगाया। मंदिर में 23 दिनों से चल रहे अमृतवाणी जप की पूर्णाहुति हुई।
गुरु चरणों की रज पाने के लिए आम से खास की लंबी कतार मंदिर के बाहर देर रात तक लगी रही। पंगत में प्रसाद चखकर संगत निहाल हुई। अपार भीड़ गुरु भक्ति में मगन होकर चल रही थी। उधर, साध-संगत व रागी जत्था गुरुवाणी का गान करते रहे।
पंजाब के पूर्व सीएम, अजय राय और चंद्रशेखर पहुंचे
संत रविदास मंदिर में दर्शन करने के लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद, पंजाब के होशियारपुर के सांसद राजकुमार जब्बेवाल, पंजाब कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद शमशेर सिंह दुलो, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पहुंचे। सभी ने संत निरंजन दास, संत श्रवण दास का आशीर्वाद लिया।
आराध्यदेव और निशान की अगुवाई में निकली 500 नागा साधुओं की पेशवाई
माघी पूर्णिमा पर महाकुंभ में चौथा अमृत स्नान चल रहा था, वहीं काशी में सबसे बड़े जूना अखाड़े के 500 नागा साधुओं ने नगर दर्शन दिया। ठाट-बाट से निकली उनकी पेशवाई के दर्शन कर लोग धन्य हो गए। अपने आराध्यदेव और निशान की अगुवाई में नागा साधु हनुमान घाट से निकले।
रास्ते भर करतब दिखाते नागा साधुओं का जगह-जगह पुष्पवर्षा के साथ स्वागत हुआ। इससे पहले जपेश्वर महादेव मठ में आराध्यदेव व निशान की पूजा हुई। भंडारे के बाद ठाट-बाट के साथ पेशवाई निकाली गई। आगे आखाड़े के आराध्यदेव दत्तात्रेय और निशान था तो बैंडबाजे और डमरुओं की निनाद के बीच 500 से अधिक श्रीमहंत, नागा साधु और साध्वी चल रहे थे।
गंगा के घाटों पर आठ लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
माघी पूर्णिमा पर बुधवार को आश्लेषा नक्षत्र और आयुष्मान व सौभाग्य योग में श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पवित्रधारा में पुण्य की पांंच-पांच डुबकी लगाई। घाट किनारे के लोगों के अनुसार अाठ लाख श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे।
मां गंगा को पुष्प, धूप और दीप आदि नैवेद्य अर्पित किया। उधर, कैथी स्थित गंगा-गोमती के संगम तट और शूलटंकेश्वर महादेव के घाट पर स्नान के लिए भी श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ी।
माघ पूर्णिमा पर महाकुंभ का चौथा अमृत स्नान था। बनारस में मंगलवार की शाम को ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। जबकि बुधवार को सुबह 6:35 बजे तक भद्राकाल रहा। फिर भी स्नान करने के लिए भोर में ही श्रद्धालु पहुंच गए थे। गंगा में स्नान करने का सिलसिला रात तक चला। दशाश्मेध घाट, शीतला घाट पर शाम तक काफी भीड़ रही। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा में पांच डुबकी लगाने का विशेष महत्व है। इसका संबंध मानव शरीर के पंच तत्वों से है। जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के रूप में मौजूद है।
विश्वनाथ धाम में 8 घंटे बाद मिले दर्शन
माघी पूर्णिमा पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में आठ लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। माघी पूर्णिमा और महाकुंभ के पलट प्रवाह के चलते बुधवार को पूरे शहर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। बाबा की शयन आरती से पहले मैदागिन तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। 6 से 8 घंटे तक लाइन में लगने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा की सिर्फ एक ही झलक मिली।