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तस्वीरों में देखें: वाराणसी में धधकती चिताओं के बीच नगर वधुओं का नृत्य, मुक्ति की कामना से गूंजी घुंघरुओं की झंकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 09 Apr 2022 01:09 AM IST
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Nagar vadhu dance in varanasi chimes of the ghungroos resonated at the crematorium with the desire for salvation
धधकती चिताओं के बीच नगरवधुओं की महफिल - फोटो : अमर उजाला

धधकती चिताओं के समानांतर घुंघरूओं की झंकार ने वाराणसी के महाश्मशान में राग-विराग को एकाकार किया। एक तरफ मन में विराग का भाव जगाती अंतिम सत्य का साक्षात्कार कराती चिताओं की आग जल रही थी तो दूसरी तरफ राग के भावों में नगर वधुओं के नृत्य से सजी निशा धीरे-धीरे साकार हो रही थी।



मणिकर्णिका तीर्थ राग-विराग की इस युगलबंदी की सदियों से चली आ रही परंपरा का फिर से साक्षी बना। इसके साथ ही बाबा महाश्मशान नाथ के तीन दिवसीय शृंगार महोत्सव का समापन हो गया।
शुक्रवार को महाश्मशान पर करुण विलाप के साथ ही चइता का आलाप गूंजा।

चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर बाबा मसान नाथ के दरबार में फिर एक बार नगर वधुओं ने कलंकित जीवन से मुक्ति की कामना से अरज लगाई। एक ओर दर्जनों शव जल रहे थे वहीं दूसरी ओर नगर वधुओं का नृत्य चल रहा था। देर शाम सजी यह महफिल मध्य रात्रि तक परवान चढ़ती रही।

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Nagar vadhu dance in varanasi chimes of the ghungroos resonated at the crematorium with the desire for salvation
धधकती चिताओं के बीच नगरवधुओं की महफिल - फोटो : अमर उजाला

सजी-धजी नगर वधुओं ने हारमोनियम, ढोलक की थाप पर नृत्य कर महाश्मशान नाथ को श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए। ऐसी मान्यता है कि बाबा को मनाने के लिए शक्ति ने योगिनी रूप धरा था। इसी स्वरूप को याद करके नगर वधुओं ने भीगी पलकों से वर्तमान जीवन की पीड़ा की अगले किसी जन्म में पुनरावृत्ति न होने की कामना की।

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Nagar vadhu dance in varanasi chimes of the ghungroos resonated at the crematorium with the desire for salvation
धधकती चिताओं के बीच नगरवधुओं की महफिल - फोटो : अमर उजाला

सर्व प्रथम बाबा का भजन, दुर्गा दुर्गति नाशिनी..., डिमिग डिमिग डमरू कर बाजे..., डिम डिम तन दिन दिन तू ही तू जग का आधार तू..., ऊं नम: शिवाय..., खेले मसानै में होरी..., चैती लागा चुनरी में दाग छुड़ाऊं कैसे, घर जाऊं कैसे... के साथ ही दादरा, ठुमरी की प्रस्तुतियां दीं।

Nagar vadhu dance in varanasi chimes of the ghungroos resonated at the crematorium with the desire for salvation
मणिकर्णिका घाट पर उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

शाम को पूजन के बाद गणिकाओं ने बाबा की आराधना की। उन्होंने गर्भगृह में दीप जलाकर पूजन किया। जीवन तारने वाली विभूति के रूप में श्मशान की भभूत को सिर माथे लगाया। औघड़ शिव स्वरूप महाश्मशाननाथ से अगले जन्म में प्रभु सेवा का वरदान मांगा। जीवन के अंधकार से छुटकारा पाने की अर्जी लगाने के साथ चैती व कजरी की धुन पर नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी।

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Nagar vadhu dance in varanasi chimes of the ghungroos resonated at the crematorium with the desire for salvation
नृत्य प्रस्तुत करतीं नगरवधुएं।
बाबा महाश्मसान नाथ के तीन दिवसीय महोत्सव की अंतिम निशा में बाबा को पंचमकार का भोग लगाया गया। तंत्रोक्त विधान से भव्य आरती मंदिर के पुजारी लल्लू महाराज ने उतारी। अतिथियों का स्वागत गुलशन कपूर व चैनू प्रसाद गुप्ता ने किया। इस दौरान बिहारी लाल गुप्ता, दिलीप यादव, विजय शंकर पांडेय, राजू साव, संजय गुप्ता, रौशन गुप्ता, विज्जु गुप्ता, बड़कू यादव आदि मौजूद रहे।
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