कारोबार: 76 हजार करोड़ की 15 परियोजनाओं को न जमीन मिली न एनओसी, अब 20 हजार करोड़ का नया लक्ष्य
Sonbhadra News: यूपी सरकार ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 के लिए टॉप फाइव जिलों में सोनभद्र को शामिल किया है। जिले में उद्योग विभाग अब तक औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन तक नहीं ढूंढ पाया। इधर, 20 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य मिल गया है।
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मध्यप्रदेश, झारखंड और बिहार राज्य की सीमा से सटे यूपी के सोनभद्र में घना वन क्षेत्र है। नगवां और कोन ब्लॉक का सीमावर्ती क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा है। नक्सल प्रभावित रहे इस पहाड़ी क्षेत्र को यूपी सरकार ने ऊर्जा के हब के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई थी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी आठ कंपनियों ने 14450 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए यूपी सरकार से एमओयू साइन किए थे। इनमें ग्रीनको कंपनी का सबसे बड़ा 17000 हजार करोड़ का निवेश प्रस्ताव है।
ग्रीनको के लिए नगवां ब्लॉक के बैजनाथ गांव में 616 हेक्टेअर जमीन चिन्हित की गई है। इस परियोजना की जद में दो लाख से ज्यादा पेड़ आ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एनओसी देने से इन्कार कर दिया है। इसी तरह जेएसडब्ल्यू, अवाडा, टॉरेंट, अदाणी, टीएचडीसी और अमूरा कंपनियों की बिजली परियोजनाएं भी एनओसी न मिलने के कारण शासन स्तर पर लटकी हुई हैं। इसके अलावा, सिदि्ध एनर्जी सॉल्युशन प्राइवेट लिमिटेड, एआरआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सोन एडवेंचर, सनराइज रिसॉर्ट, रेवनोमिक्स सॉल्युशन एलएलपी, ईमूव मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड, पूर्वांचलत कारपेट एसोसिएशन की परियोजनाएं भी जमीन न मिलने के कारण शुरू नहीं हो पाई हैं।
इन परियोजनाओं काे अब तक नहीं मिली जमीन
- सिदि्ध एनर्जी साॅल्युशन प्राइवेट लिमिटेड - 30 करोड़ रुपये
- एआरआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड - 25 करोड़ रुपये
- सोन एडवेंचर - 25 करोड़ रुपये
- सनराइज रिसाॅर्ट - 25 करोड़ रुपये
- रेवनोमिक्स साॅल्युशन एलएलपी - 15 करोड़ रुपये
- ईमूव मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड - 10 करोड़ रुपये
- पूर्वांचलत कारपेट एसोसिएशन - 25 करोड़ रुपये
इन परियोजनाओं को नहीं मिली एनओसी
| कंपनी | चिह्नित गांव | क्षमता (मेगावाट) | लागत |
| ग्रीनको | बैजनाथ | 3660 | 17181 करोड़ |
| जेएसडब्ल्यू | चेरुई | 1200 | 8000 करोड़ |
| अवाडा | चिचलिक | 1120 | 7400 करोड़ |
| टाॅरेंट | सोमा | 2400 | 13200 करोड़ |
| टॉरेंट | ससनई | 1750 | 9600 करोड़ |
| अडानी | पनौरा | 1500 | 7400 करोड़ |
| टीएचडीसी | बसुहारी | 1200 | 6600 करोड़ |
| अमूरा | झरिया | 1620 | 7000 करोड़ |
वाटर स्पोर्ट्स व एडवेंचर एक्टिविटी और ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए एमओयू किया था। इसके लिए धंधरौल बांध या विजयगढ़ किले के आसपास जमीन की मांग की गई थी। जमीन न मिलने से सेंटर की स्थापना नहीं हो पाई है। अपने स्तर से ट्रैकिंग व अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। -नीरज द्विवेदी, सोन एडवेंचर
रिसाॅर्ट के लिए लोढ़ी व चुर्क के आसपास लीज पर सरकारी भूमि मांगी गई थी, लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं होने से इस पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अगर जमीन उपलब्ध होती है तो इस पर काम आरंभ किया जाएगा। -रमेश जायसवाल, प्रोपराइटर, सनराइज रिसॉर्ट
पंप स्टोरेज विद्युत परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित हो चुकी है। सर्वे भी हो चुका है। एनओसी की प्रक्रिया शासन स्तर पर है। वहां से नियमित माॅनीटरिंग चल रही है। जल्द ही प्रस्ताव धरातल पर नजर आएंगे, जहां तक जमीन की उपलब्धता का मामला है तो इसके लिए औद्योगिक आस्थान चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। -वीके चौधरी, उपायुक्त उद्योग
