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कारोबार: 76 हजार करोड़ की 15 परियोजनाओं को न जमीन मिली न एनओसी, अब 20 हजार करोड़ का नया लक्ष्य

बीरेंद्र कुमार शुक्ल, अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 31 Jan 2026 11:12 AM IST
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सार

Sonbhadra News: यूपी सरकार ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 के लिए टॉप फाइव जिलों में सोनभद्र को शामिल किया है। जिले में उद्योग विभाग अब तक औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन तक नहीं ढूंढ पाया। इधर, 20 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य मिल गया है। 
 

UP government included Sonbhadra among top five districts for Ground Breaking Ceremony-5
Sonbhadra News - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार के भूमि पूजन समारोह यानी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 के लिए टॉप फाइव जिलों में सोनभद्र को शामिल किया गया है। जिले को इस बार 20 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य दिया गया है लेकिन पहाड़ी और घना वन क्षेत्र होने के कारण पिछली जीबीसी की 76536 करोड़ की 15 परियोजनाएं जमीन और एनओसी न मिलने के कारण अटकी हुई हैं। उद्योग विभाग अब तक जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए जमीन तक नहीं ढूंढ पाया है। ऐसे में यहां पर कारोबारी सुविधाएं भी विकसित हो पा रही हैं। जमीन आवंटन और एनओसी में देरी होने पर उद्यमी निराश हैं। विभागीय अधिकारी मामला शासन स्तर से जुड़ा बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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मध्यप्रदेश, झारखंड और बिहार राज्य की सीमा से सटे यूपी के सोनभद्र में घना वन क्षेत्र है। नगवां और कोन ब्लॉक का सीमावर्ती क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा है। नक्सल प्रभावित रहे इस पहाड़ी क्षेत्र को यूपी सरकार ने ऊर्जा के हब के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई थी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी आठ कंपनियों ने 14450 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए यूपी सरकार से एमओयू साइन किए थे। इनमें ग्रीनको कंपनी का सबसे बड़ा 17000 हजार करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। 
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ग्रीनको के लिए नगवां ब्लॉक के बैजनाथ गांव में 616 हेक्टेअर जमीन चिन्हित की गई है। इस परियोजना की जद में दो लाख से ज्यादा पेड़ आ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एनओसी देने से इन्कार कर दिया है। इसी तरह जेएसडब्ल्यू, अवाडा, टॉरेंट, अदाणी, टीएचडीसी और अमूरा कंपनियों की बिजली परियोजनाएं भी एनओसी न मिलने के कारण शासन स्तर पर लटकी हुई हैं। इसके अलावा, सिदि्ध एनर्जी सॉल्युशन प्राइवेट लिमिटेड, एआरआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सोन एडवेंचर, सनराइज रिसॉर्ट, रेवनोमिक्स सॉल्युशन एलएलपी, ईमूव मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड, पूर्वांचलत कारपेट एसोसिएशन की परियोजनाएं भी जमीन न मिलने के कारण शुरू नहीं हो पाई हैं।

इन परियोजनाओं काे अब तक नहीं मिली जमीन

  • सिदि्ध एनर्जी साॅल्युशन प्राइवेट लिमिटेड - 30 करोड़ रुपये
  • एआरआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड - 25 करोड़ रुपये
  • सोन एडवेंचर - 25 करोड़ रुपये
  • सनराइज रिसाॅर्ट - 25 करोड़ रुपये
  • रेवनोमिक्स साॅल्युशन एलएलपी - 15 करोड़ रुपये
  • ईमूव मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड - 10 करोड़ रुपये
  • पूर्वांचलत कारपेट एसोसिएशन - 25 करोड़ रुपये

इन परियोजनाओं को नहीं मिली एनओसी

कंपनी             चिह्नित गांव क्षमता (मेगावाट) लागत
ग्रीनको बैजनाथ             3660             17181 करोड़
जेएसडब्ल्यू चेरुई             1200             8000 करोड़
अवाडा चिचलिक 1120             7400 करोड़
टाॅरेंट             सोमा             2400 13200 करोड़
टॉरेंट             ससनई             1750             9600 करोड़
अडानी पनौरा             1500             7400 करोड़
टीएचडीसी बसुहारी             1200             6600 करोड़
अमूरा             झरिया             1620             7000 करोड़

वाटर स्पोर्ट्स व एडवेंचर एक्टिविटी और ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए एमओयू किया था। इसके लिए धंधरौल बांध या विजयगढ़ किले के आसपास जमीन की मांग की गई थी। जमीन न मिलने से सेंटर की स्थापना नहीं हो पाई है। अपने स्तर से ट्रैकिंग व अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। -नीरज द्विवेदी, सोन एडवेंचर 
 
रिसाॅर्ट के लिए लोढ़ी व चुर्क के आसपास लीज पर सरकारी भूमि मांगी गई थी, लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं होने से इस पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अगर जमीन उपलब्ध होती है तो इस पर काम आरंभ किया जाएगा। -रमेश जायसवाल, प्रोपराइटर, सनराइज रिसॉर्ट 
 
पंप स्टोरेज विद्युत परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित हो चुकी है। सर्वे भी हो चुका है। एनओसी की प्रक्रिया शासन स्तर पर है। वहां से नियमित माॅनीटरिंग चल रही है। जल्द ही प्रस्ताव धरातल पर नजर आएंगे, जहां तक जमीन की उपलब्धता का मामला है तो इसके लिए औद्योगिक आस्थान चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। -वीके चौधरी, उपायुक्त उद्योग

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