बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र के इब्राहिमपुर पंचायत अंतर्गत पछीयारी मलाही और सिकंदरा गांव में खसरा (मीजल्स) के प्रकोप से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए पांच संदिग्ध मरीजों के सैंपल में से चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद व्यापक जांच और सर्वेक्षण में पछीयारी मलाही में 19 तथा सिकंदरा गांव में 13 मरीजों की पहचान की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किसी भी क्षेत्र में दो या उससे अधिक मरीज मिलने पर उसे खसरा का आउटब्रेक माना जाता है। वर्तमान में भी प्रतिदिन नए मरीज सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति चिंता जनक बनी हुई है।
कुछ दिन पहले इब्राहिमपुर पंचायत के पछीयारी मलाही वार्ड संख्या 9 में 8 और नयाटोला सलेमपुर वार्ड संख्या 12 में 4 खसरा के मामले मिले थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम ने क्षेत्र में कैंप कर स्थिति पर नियंत्रण की कवायद तेज कर दी है।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम डोर-टू-डोर अभियान चलाकर बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की जांच कर रही है और अभिभावकों को खसरा का टीका समय पर लगवाने के लिए जागरूक कर रही है। टीम प्रत्येक घर में जाकर बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है। डब्ल्यूएचओ की टीम अगले 28 दिनों तक लगातार इन प्रभावित इलाकों में कैंप करेगी।
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जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अवधेश कुमार ने कहा कि फिलहाल इस प्रकोप को टीकाकरण की विफलता नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि खसरा के अचानक बढ़े मामलों के कारणों की जांच और शोध के बाद ही स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
राणाबीघा पीएचसी, आंगनवाड़ी केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं की देखरेख में टीकाकरण अभियान संचालित किया जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को एक बार फिर व्यापक स्तर पर विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खसरा का यह प्रकोप सरकार के दिसंबर 2026 तक भारत को खसरा मुक्त बनाने के लक्ष्य के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में समय पर टीकाकरण और जनजागरूकता ही इस बीमारी पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय है।