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भिवानी: गांव कैरू के वीर सपूत हवलदार राजेश कुमार का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
गांव कैरू में भारत माता के वीर सपूत के अंतिम संस्कार ने सबकी आंखें नम कर दी और सभी की आंखों को नम कर डाला। लोगों का राजेश के प्रति प्रेम और जज्बा वाकई देशभक्ति को समर्पित था, जो उनके अंतिम दर्शन व संस्कार में देखने को मिला। भीड़ अधिक होने से महिलाओं व युवाओं ने छत्त व आसपास पेड़ों पर चढ़कर तो दिव्यांग भी दर्शन के लिए अपने आप को नहीं रोक पाए।
शहीद के अंतिम दर्शन में लगभग बड़ी संख्या में इलाके के लोगों का जनसैलाब उमड़ा। हवलदार राजेश कुमार (42) आईटीबी पुलिस में 55 बटालियन के जवान थे और 29 दिन पहले ही अवकाश पूरा करके डयूटी पर गए। अब दोबारा आए तो तिरंगे से लिपटकर ही वापिस गांव पहु़ंचे। असम व अरूणाचल प्रदेश के बीच तेजपूर पहाड़ी इलाके में देश की रक्षा कर रहे थे। वह 9000 फीट ऊंचाई पर थे। 21 तारीख उनके लिए आखिरी दिन था। सुबह 6 बजे जब वह वाशरुम में गये तो हृदयगति रुकने से मौत हो गई। सेना कार्यालय से परिवार को सूचना दी गई। 23 मार्च शाम को पार्थिव शरीर को सदर थाना भिवानी में रखा गया।
तीन दिन के बाद राजेश का पार्थिव शरीर सैन्य वाहन में जब तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव कैरू में पहु़ंचा, तो जब.... तक सूरज चांद रहेगा राजेश तेरा नाम रहेगा और राजेश कुमार अमर रहे के गगन भेदी नारों से कैरू क्षेत्र का आसमान गूंज उठा। पार्थिव शरीर को पहले उनके निवास स्थान पर लाया गया और जहां जवानों ने सलामी दी। तीन दिन से बेहोश पत्नी मीना ने तिरंगे से लिपटा शव देख एकदम से चिल्लाई और अपने आप को रोक नहीं पाई। युवा और महिलाएं जोर शोर से बिलख पड़े। 5 वर्ष की बेटी अंजली ने पिता के दर्शन करते ही सहम उठी। जब अंतिम संस्कार के लिए निवास स्थान से लेकर चले तो एक किलोमीटर तक युवा जेसीबी मशीन में चढ़कर पुष्पों को बिखेरते हुए संस्कार स्थल तक पहु़ंचे। राजेश का अंतिम संस्कार में जाटूसाना (रेवाड़ी) से आई 28 बटालियन के एसआई सुरेश के नेतृत्व में सैन्य टुकड़ी ने सलामी दी। वही तिरंगे झंडे को राजेश के पिता तारा को सम्मान के साथ सौंपने लगे तो टुकड़ी के अधिकारी के आंखों में आंसू बहने लगे। राजेश के भाई ने अग्नि दी और आंखों में आंसू की धारा फूट पड़ी। इस तरह से राजेश पंचत्तव में विलीन हुए।
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