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Amidst indiscriminate firing by terrorists, Krishna from Hisar became a 'Rakhshak' (protector) for his comrade during Operation Rakshak; awarded the Shaurya Chakra for his bravery.
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आंतकियों की अंधाधुंध गोलीबारी, ऑपरेशन रक्षक में अपने साथी के लिए रक्षक बने हिसार के कृष्ण; बहादुरी के लिए मिला शौर्य चक्र
ऑपरेशन रक्षक अभियान के दौरान आंतकियों के हमले में साथी घायल होकर हमलावरों के बेहद करीब गिर गया तो अपने साथी को बचाने के लिए गार्डसमैन कृष्ण ने अपनी जान दांव पर लगा दी। अदम्य साहस का परिचय देते हुए 23 वर्षीय गार्डसमैन कृष्ण आतंकियों पर गोलियां बरसाते हुए उनके बेहद करीब पहुंच गए।
गोलियां लगने से खुद बुरी तरह से जख्मी होने के बावजूद अपने साथी को वहां से निकाल लाए। कृष्ण कुमार ने एक आंतकी कमांडर सहित दो को मौत के घाट उतार दिया। इस बहादुरी के लिए कृष्ण कुमार को सेना ने वर्ष 2010 में स्वतंत्रता दिवस पर शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
शहीद कृष्ण कुमार के पिता महेंद्र सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि कृष्ण कुमार का जन्म 15 अगस्त 1986 को हुआ था।
जब वह 11 वीं कक्षा के छात्र थे तो सेना भर्ती के लिए नागपुर पहुंच गए। 31 मार्च 2004 को कृष्ण कुमार सेना में भर्ती हो गए। उन्होंने शारीरिक व लिखित परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास की। जिसके बाद उनको सेना के फर्स्ट गार्ड पंजाब टुकड़ी का हिस्सा बनने का गौरव मिला।
इसके बाद उन्होंने करीब सवा पांच साल तक असम, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर सहित कई अन्य प्रदेशों में सेवाएं दी।
इसके बाद उन्होंने 21 आरआर की टुकड़ी में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में भेजा गया। सेना की इस टुकड़ी को 2 जुलाई 2009 को जम्मू -कश्मीर एरिया में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली। आतंकी घने जंगल एरिया में छिपे थे। गार्ड्समैन कृष्ण कुमार 02 जुलाई 2009 को ऑपरेशन टीम का हिस्सा थे।
उसने संदेहास्पद हलचल देखकर साथियों को आगाह किया, जिससे अतंकवादियों की तरफ से अंधाधुंध गोलीबारी होने पर कोई हानि नहीं हुई। वह जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ता रहा और सही स्थान हासिल करके उसने एक आतंकवादी पर हमला किया। 3 जुलाई को 2009 को कृष्ण कुमार ने स्वेच्छा से वाडरबाला जंगल की ऑपरेशन सर्च में हिस्सा लिया। घने जंगल में सेना की टुकड़ी के साथ खोजबीन करते समय आतंकवादियों में नजदीक से गोलीबारी की।
आतंकियों की ओर से फायरिंग की गई। जिसमें कृष्ण कुमार व उसका साथी घायल हो गये। कृष्ण कुमार का एक साथी घायल होने के बाद आंतकियों के करीब 5 मीटर के एरिया में गिर गया। घायल होने के बावजूद अपनी सुरक्षा को चिंता किए बिना कृष्ण कुमार आगे बढ़ता गया। उसने आतंकवादियों के बेहद करीब पहुंच कर अपने घायल साथी को वहां से सुरक्षित निकाला । कृष्ण कुमार ने विदेशी आतंकवादी जिला कमाण्डर अल-बदर अब्दुल्ला को मार गिराया। बेहद गंभीर होने की स्थिति में भी कृष्ण कुमार आखिरी सांस तक बहादुरी के साथ लड़ता रहा। इस बहादुरी के लिए शहीद गार्ड्समैन कृष्ण कुमार को शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
रात पौने दस बजे आया था फोन...
मैं उस समय रोडवेज के हांसी डिपो में अपनी डयूटी पर था। 3 जुलाई 2009 की रात करीब पौने दस बजे सेना के अधिकारियों ने मुझे फोन कर इस बारे में जानकारी दी। तीन दिन बाद 6 जुलाई को शहीद कृष्ण का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। हमारे गांव के अलावा आसपास के 25 से अधिक गांवों के लोग शहीद को अंतिम विदाई के लिए एकत्र हुए। सेना की टुकड़ी ने नायब तहसीलदार के नेतृत्व में शहीद को सलामी दी।
तीन साल में चार मौत से बिखर गया परिवार...
जिस दिन 6 जुलाई 2009 को जिस दिन कृष्ण कुमार का अंतिम संस्कार हुआ उसी दिन कृष्ण के मामा गांव खानक निवासी ओमप्रकाश की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जिसके बाद कृष्ण की मां प्रेमी देवी भी चारपाई से नहीं उठ सकी। करीब तीन साल बाद वह भी दुनिया छोड़ गई। दादी की मौत के चार दिन बाद कृष्ण के भतीजे दस महीने के आर्यन की मौत हो गई। इतने हादसे होने के बाद कृष्ण का बड़ा भाई पवन कुमार ने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दी।
बेटे के बाद बहू- पौता भी जाने ने अंदर से तोड़ दिया...
महेंद्र सिंह बताते हैं कि शहीद होने से कुछ दिन पहले ही कृष्ण कुमार छुट्टी काट कर गया था। उस समय शादी को 10 महीने ही हुए थे। जिसके बाद उसकी पत्नी गर्भवती थी। कृष्ण कुमार की शहादत के बाद उसकी पत्नी कविता हमें छोड़ कर अपने मायके चली गई। कृष्ण की शहादत के करीब 8 महीने बाद हमारा पोता निकुंज पैदा हुआ था। अब उनका हमसे कोई संपर्क नहीं है।
गांव में लगी शहीद की प्रतिमा
गांव कंवारी में बस अड्डे के पास शहीद कृष्ण कुमार की प्रतिमा लगाई हुई है। शहीद कृष्ण कुमार समिति गांव में उनके नाम से खेल व शैक्षणिक प्रतियोगिताओं का आयोजन कराती है। शहीद की पुण्यतिथी तथा जन्मदिन पर काफी लोग उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हैं।गांव के बस अड्डे पर बस क्यू शेल्टर में भी शहीद के चित्र लगाए गए हैं।
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