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Last rites of Air Force Jawan Kamal Kamboj were performed in Lohari Ragho village of Hisar
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हिसार में सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए कमल कंबोज, लोहारी राघो में हर आंख हुई नम
हिसार के नारनौंद में भारतीय वायुसेना के 25 वर्षीय जवान कमल कंबोज का गुरुवार को उनके पैतृक गांव लोहारी राघो में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कमल के चचेरे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी।
बुधवार को ऑपरेशन सिंदूर के कारण छुट्टियां रद्द होने पर ड्यूटी जाते समय डंपर की टक्कर से कमल की मौत हो गई थी। हादसे में उनके साथ लिफ्ट ले रही एक महिला गंभीर रूप से घायल हुई, जिनका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। एयरफोर्स के अधिकारियों ने परिवार को तिरंगा सौंपा और सैन्य टुकड़ी ने सलामी दी।
पिता का 24 साल पहले हो चुका देहांत
कमल के पिता का देहांत 24 साल पहले हो चुका। उस वक्त वे अपनी मां के गर्भ में थे। उनके जन्म के बाद उनकी मां शीला देवी अपने मायके लोहारी राघो आ गई। कमल मूल रूप से फतेहाबाद जिले के रतिया क्षेत्र के गांव शकरपुरा के निवासी थी, लेकिन उनका पूरा जीवन अपने नाना के यहां बीता। कमल कंबोज पिता की मौत के बाद मां शीला देवी मिड डे मील की नौकरी कर घर चलाती थीं।
कमल के बचपन के दोस्त कमल वैध बताते हैं कि कमल न सिर्फ खुद की पढ़ाई को लेकर गंभीर था, बल्कि गरीब बच्चों की मदद भी करता था। जो बच्चे खेल के मैदान में बिना जूते या किट के आते थे। जब 2022 में भारतीय वायु सेवा में उसकी नौकरी लग गई और उसकी ट्रेनिंग के लिए पटना जाना था तो उसके पास ट्रेन का किराया भी नहीं था।
तो दोस्त कमल वैध के साथ एक ही टिकट पर दोनों ने सफर किया। खाने के पैसे नहीं थे। घर से बना खाना साथ ले गए और तीन दिन तक वही बासी खाना खाकर गुजारा किया। नौकरी लगने के बाद कमल ने अपनी माता की नौकरी भी छुड़वा दी थी ताकि वे आराम कर सकें। कमल उनकी मां की आखिरी उम्मीद और बुढ़ापे का सहारा थे, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ तहस नहस कर दिया।
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