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Villagers in Yamunanagar met the DC to protest against the road passing through the Adi Badri pilgrimage site and threatened to protest.
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यमुनानगर में आदि बद्री तीर्थ स्थल से गुजरने वाले रास्ते के विरोध में ग्रामीण डीसी से मिले, प्रदर्शन की चेतावनी
व्यासपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल आदि बद्री में हिंदू संगठनों और काठगढ़ के ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला उपायुक्त (डीसी) पार्थ गुप्ता से मुलाकात की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के एक विधायक द्वारा आदि बद्री से 5 किलोमीटर लंबे रास्ते को विशेष समुदाय के लोगों के लिए खोलने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा और यदि रास्ता खोला गया तो वे बड़े स्तर पर जन आंदोलन को मजबूर होंगे।मुलाकात के दौरान आदि बद्री महंत और काठगढ़ के ग्रामीणों ने बताया कि यह तीर्थ स्थल शास्त्रों में वर्णित है, जहां नारायण जी की प्राचीन मूर्ति स्थापित है।
हिमाचल प्रदेश से यदि रास्ता मंदिर परिसर से होकर निकाला गया, तो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था आहत होगी। उन्होंने कहा कि पहले भी विशेष समुदाय के लोगों द्वारा मंदिर का घेराव और हंगामा किया जा चुका है, जिससे विवाद बढ़ चुका है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि वे इस रास्ते का विरोध करेंगे, चाहे इसके लिए प्रदर्शन ही क्यों न करना पड़े।गांव के पूर्व सरपंच सुल्तान सिंह ने बताया कि आदि बद्री की भूमि श्राइन बोर्ड के अंतर्गत नहीं आती। यह मंदिर परिसर गांववालों द्वारा दान की गई भूमि है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि रास्ता बनाना ही है तो इसे मंदिर परिसर और गांव से दूर बनाया जाए।
पूर्व सरपंच ने कहा कि यदि रास्ता यहीं से निकल गया तो हम जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे। आदि बद्री यमुनानगर जिले के बिलासपुर तहसील में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है, जो सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है।
यह स्थान पुरातात्विक, धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व रखता है, जहां 1500-2000 वर्ष पुराने बौद्ध स्तूप और 9वीं शताब्दी के हिंदू मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सिरमौर जिले से आदि बद्री तक 7 किलोमीटर सड़क परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी दिलाई है, जो यात्रा दूरी को 50 प्रतिशत से अधिक कम कर देगी।
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