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Bilaspur: सूखे पेड़ काटने की मंजूरी लेकर जंगल से काट दिए खैर के पांच हजार हरे पेड़
बिलासपुर जिले के स्वारघाट वन परिक्षेत्र के अंतर्गत छड़ोल, कचौली और कल्लर जंगलों में खैर के पेड़ों के अवैध कटान करने का आरोप लगा है। जनवरी से अप्रैल के बीच वन माफिया ने सूखे पेड़ों की आड़ में करीब पांच हजार खैर के हरे-भरे पेड़ों को काट डाला। इतना ही नहीं, जमीन में तीन-तीन फीट तक खोदकर पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ दीं। इसकी शिकायत पर्यावरण प्रेमियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, स्टेट विजिलेंस और प्रिंसिपल फॉरेस्ट अफसर को भेज दी है। पत्र के माध्यम से स्थानीय लोगों ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि माफिया ने निजी भूमि से सूखे पेड़ काटने की अनुमति लेकर सरकारी जंगल से हजारों हरे पेड़ काट दिए। नियमों के मुताबिक जंगल झाड़ी श्रेणी की भूमि (निजी या सरकारी) से खैर का कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है। बाजार में खैर की लकड़ी की जबरदस्त मांग है और एक बड़े पेड़ की कीमत करीब एक लाख रुपये तक है। मामले में वन विभाग ने केवल पांच ट्रकों को परमिशन दी थी, लेकिन 150 तक गाड़ियां जंगल से लकड़ी ढोने में लगी रहीं। तीनों बीट रत्नपुर वन खंड में आती हैं। इनमें कटान के बाद खैर सीधे नीचे खड्ड तक पहुंचाया गया। जहां से गाड़ियों में लोड कर इसे बाहरी राज्यों को भेजा गया। हिमाचल-पंजाब बॉर्डर पर नाकाबंदी के बाद भी किस तरह से खैर से भरीं गाड़ियां प्रदेश की सीमा से बाहर निकलीं, यह भी सवाल है। हैरान करने वाली बात यह है कि कल्लर बीट की सीमा में स्थित ट्राई फेंसिंग प्लांटेशन क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है, वहां से भी 50 साल पुराने पेड़ों को काटा गया। बावजूद इसके विभाग कार्रवाई के नाम पर अभी तक कुछ नहीं कर रहा है। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट समीर रस्तोगी ने कहा कि स्वारघाट रेंज की तीन वन बीट में हुए अवैध खैर कटान का मामला संज्ञान में आया है। इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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