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At the meeting of the Sarva Devta Seva Samiti, a demand was raised to the administration for a permanent place for the deities.
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सर्व देवता सेवा समिति की सभा में प्रशासन से देवताओं के स्थायी स्थान की उठाई मांग
सर्व देवता सेवा समिति जिला मंडी की आम सभा की बैठक देव, संस्कृति सदन कांगनी में आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी कारदारों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने की। सभा में बताया गया कि इस वर्ष सभी पंजीकृत देवी-देवताओं को पड्डल मैदान की सीढ़ियों पर बैठने का स्थान दिया गया है और सभी कारदारों को उनके निर्धारित स्थानों की जानकारी दे दी गई है। समिति ने सरकार से मांग की कि देवी-देवताओं के लिए पड्डल मैदान में स्थायी स्थान सुनिश्चित किए जाएं ताकि बार-बार स्थान बदलने की आवश्यकता न पड़े।
कारदारों ने बताया कि पहले राजा के समय केवल दो मेले पड्डल में होते थे, बाद में वर्ष 1972-73 के आसपास सभी मेले पड्डल स्थानांतरित किए गए। पहले देवी-देवता कम संख्या में आते थे और सेना बैरक क्षेत्र में बैठते थे, बाद में यह भूमि शिक्षा विभाग को दी गई और देवी-देवता वहां बैठने लगे। लगभग 52-53 वर्षों बाद अब देवी-देवताओं को फिर से पड्डल मैदान की सीढ़ियों पर सरकारी भूमि में बैठाया जा रहा है। हाल ही में प्रशासन की आम सभा में धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर और उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने कारदारों की समस्याओं को देखते हुए इस व्यवस्था को स्वीकृति दी, जिसे ऐतिहासिक फैसला बताया गया। समिति ने विधायक और उपायुक्त का आभार जताते हुए मांग की कि कुल्लू की तर्ज पर इन स्थानों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। सभा में शिवरात्रि के दौरान माधोराय जी के साथ निकलने वाली तीनों जलेब को लेकर भी चिंता जताई गई। कारदारों ने कहा कि पहले जलेब शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से निकलती थी, लेकिन अब कुछ तत्वों द्वारा सीटी बजाना, फिल्मी गाने और नशीले पदार्थों का प्रयोग किया जा रहा है, जो देव परंपरा के विरुद्ध है। सभी कारदारों से आग्रह किया गया कि जलेब के दौरान देव परंपरा और प्रोटोकॉल का पालन करें तथा किसी भी अनुशासनहीन तत्व की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। साथ ही भारी भीड़ को देखते हुए नंगी तलवारों के साथ नाटी करने की परंपरा पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। यह भी निर्णय लिया गया कि इस वर्ष माधोराय जी की जलेब पड्डल मैदान में क्रम से बैठे देवी-देवताओं के सामने से होते हुए चानणी तक जाएगी। जलेब के दौरान देवताओं के कारदार अपने-अपने देवता की छड़ी और पुष्प लेकर माधोराय जी का स्वागत करेंगे, जिससे पुरानी परंपरा का पालन हो सके।
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