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Rampur Bushahr: नाथपा-झाकड़ी विस्थापितों की जमीन पर बाहरी लोगों को बसाने का विरोध, ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार
Ankesh Dogra
Updated Tue, 04 Aug 2026 02:40 PM IST
शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के ज्यूरी पंचायत स्थित कोटला गांव में नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना से विस्थापित ग्रामीणों ने परियोजना की अर्जित भूमि पर बाहरी लोगों को बसाने का विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का परियोजना की ओर से उपयोग नहीं किया गया, उसे नियमों के अनुसार सबसे पहले विस्थापित परिवारों को वापस किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों ने एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
ज्यूरी पंचायत प्रधान राजकांता की अध्यक्षता में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और मंदिर कमेटी के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कोटला गांव की खाली भूमि पर गुजर समुदाय को बसाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार से इन परिवारों के पुनर्वास के लिए किसी अन्य स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1990 में 1500 मेगावाट नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना की कॉलोनी के निर्माण के लिए उनकी जमीन और मकान अधिग्रहित किए गए थे। उनका आरोप है कि परियोजना ने जिस भूमि का उपयोग नहीं किया, वह आज भी खाली पड़ी है। ऐसे में इस भूमि पर पहला अधिकार परियोजना से प्रभावित और विस्थापित परिवारों का बनता है। उनका कहना है कि सरकार विस्थापितों की मांगों को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को वहां बसाने की तैयारी कर रही है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कोटला गांव देव समाज से जुड़ा क्षेत्र है और यहां प्राचीन मंदिर स्थित है। ऐसे में बाहरी लोगों को बसाने से सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए खाली पड़ी परियोजना भूमि उन्हें वापस सौंपी जाए और पुनर्वास के लिए अन्य उपयुक्त स्थान चिन्हित किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे जल्द ही उपायुक्त शिमला से मिलकर मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे। इस दौरान वार्ड सदस्य संदेशा वर्मा, मंदिर कमेटी प्रधान केवल राम वर्मा, हरीश खन्ना, राजकुमार लश्टी, शीशी राम मेहता, गोविंद वर्मा, राम दास, राजेंद्र खन्ना सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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