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Rampur Bushahr: सुंडा-सनेई सड़क पर सुरक्षित आवाजाही की मांग तेज, ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
Ankesh Dogra
Updated Fri, 31 Jul 2026 05:45 PM IST
वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा के बाद से सुंडा-सनेई सड़क पर सफर आज भी जोखिम भरा बना हुआ है। नोग वैली सहित 12/20 क्षेत्र के हजारों ग्रामीण और स्कूली बच्चे रोजाना भूस्खलन प्रभावित मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। सड़क की सुरक्षा और खोयी गांव को संभावित खतरे से बचाने की मांग को लेकर शुक्रवार को दो पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एसडीएम रामपुर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
डंसा और शिंगला पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह से मांग की कि सुंडा-सनेई सड़क और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का संयुक्त विभागीय समिति के माध्यम से वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रतिनिधिमंडल में डंसा पंचायत प्रधान पदमा कौंग, पूर्व प्रधान देशराज हुडन, रचोली पंचायत के उपप्रधान ज्योति लाल सानी, बीडीसी सदस्य मोरार कांत, इशा चौहान, तिलक राज और विष्णु शर्मा सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।
ग्रामीणों ने बताया कि सुंडा-सनेई सड़क पर हर वर्ष बरसात के दौरान पहाड़ी से भूस्खलन होता है। इससे सड़क पर लगातार मलबा और बड़े पत्थर गिरते रहते हैं। यह मार्ग नोग वैली सहित 12/20 क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। बावजूद इसके, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 की भारी बारिश में सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है। रोजाना स्कूली बच्चे, कर्मचारी और स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर इस सड़क से गुजर रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के ठीक नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव स्थित है। पहाड़ी से लगातार मलबा और पत्थर गिरने के कारण गांव के लोगों में हर समय भय का माहौल बना रहता है। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद सुरक्षा संबंधी स्थायी कार्य नहीं होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
पूर्व प्रधान देशराज हुडन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द सुरक्षा कार्य शुरू नहीं किए तो ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि संयुक्त विभागीय समिति बनाकर वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी समाधान निकाला जाए।
एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि समस्या गंभीर है और इसका स्थायी समाधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही संभव है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग और ज्ञापन को उपायुक्त शिमला के समक्ष रखा जाएगा ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
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