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Una: 74 की उम्र में नवाचार की खेती, बंगाणा के रोशन लाल ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी
हौसला उम्र का मोहताज नहीं होता। ऊना जिला के बंगाणा उपमंडल के उपरली बॉल गांव निवासी 74 वर्षीय रोशन लाल इसकी जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने न केवल खेती के पारंपरिक ढर्रे को बदला, बल्कि ड्रैगन फ्रूट जैसी उन्नत और उच्च मूल्य की फसल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार की नई इबारत लिख दी। वर्ष 2023 में जब रोशन लाल ने छोटे स्तर पर ड्रैगन फ्रूट की खेती का बीड़ा उठाया, तब यह क्षेत्र के लिए एक नया प्रयोग था। लेकिन आज, 25 कनाल भूमि में लगाए गए ताइवान पिंक किस्म के 3300 पौधे फल देने लगे हैं और किसान की मेहनत रंग ला रही है। खेत से ही प्रति फल 80 से 100 रुपये में बिक्री हो रही है और इस साल उन्हें 4 से 4.5 लाख रुपये तक की आमदनी की उम्मीद है। ड्रैगन फ्रूट औषधीय गुणों से भरपूर होता है, इसमें पोटेशियम, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग तत्व शामिल हैं। साथ ही यह स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर फल है, जो बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है। इसकी विशेषता यह है कि एक बार रोपित पौधा 25 से 30 वर्षों तक फल देता है, जिससे यह किसानों के लिए एक स्थायी आमदनी का स्रोत बन सकता है। रोशन लाल ने केवल ड्रैगन फ्रूट पर निर्भर न रहकर प्याज, लहसुन और प्याज की पनीरी जैसे फसलों की मिश्रित खेती भी अपनाई। पिछले वर्ष उन्होंने इससे 20 हजार रुपये की आमदनी अर्जित की, जबकि ड्रैगन फ्रूट की आंशिक बिक्री से 15 हजार रुपये का लाभ हुआ। रोशन लाल का कहना है कि पहले जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान होता था, लेकिन अब बागवानी विभाग के सहयोग से स्थितियां सुधरी हैं। बागवानी विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि अगस्त 2023 में उपरली बॉल क्षेत्र में 8 प्रगतिशील किसानों के साथ फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन साइट स्थापित की गई। 18.75 लाख रुपये की परियोजना के तहत सीमेंट पोल, पौधारोपण, बाड़बंदी और गड्ढा निर्माण जैसे कार्य किए गए हैं। जिलाधीश ऊना जतिन लाल ने कहा कि ड्रैगन फ्रूट जैसी नवाचारी और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक आत्मनिर्भरता को साकार करने में सहायक है। ऊना जिले में किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में योगदान दे सकें।
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