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Jhalawar School Roof Collapse: Many statements related to the accident revealed the truth, children had warned
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Jhalawar School Roof Collapse: हादसे से जुड़े कई बयानों से सच का खुलासा हुआ, बच्चों ने किया था आगाह।
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: अभिलाषा पाठक Updated Sat, 26 Jul 2025 11:12 AM IST
किसी ने इमारत बनाने में लापरवाही की होगी, किसी ने रखरखाव का ध्यान नहीं रखा, किसी ने शिकायत को नजरअंदाज कर दिया तो किसी ने गिरती छत को देख रहे मासूमों की बात अनसुनी कर दी। नतीजा- राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे में सात बच्चों की जान चली गई। ये उन गरीबों के बच्चे थे, जिनके परिवार अपना भविष्य बदलने के लिए उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल भेजते थे। ...लापरवाही, अनदेखी और अमानवीयता जैसे शब्द भी इस हादसे के जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा करने के लिए नाकाफी हैं। हादसे के बाद ग्रामीणों के जो बयान सामने आए, वो और भी चौंका देने वाले हैं। आइए जानते हैं..महिला ने जवाब दिया कि प्रशासन को बता दिया था। इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। मीना मैडम हैं उनकी गलती है। एक छोटा बच्चा था जिसने ये बोल दिया था कि कंकण गिर रहे हैं। छत गिरने वाली है। मीना मैडम ने कमरे की कुंडी लगा दी।
इसके बाद गांव वालों ने कुंडी खोली, मैडम ने नहीं खोली। मैडम बाहर ही रही। मैडम का नाम मीना मैडम है।' पीड़ित परिवार की महिला का ये बयान इसलिए मायने रखता है कि अगर छोटे बच्चे की बात को शिक्षक ध्यान दे देते तो शायद बच्चे स्कूल के भवन से बाहर आ जाते और हादसे में उनकी जान न जाती।सरा बयान- अब गांव वालों का दूसरा बयान जानते हैं। यह बयान बनवारी नाम के व्यक्ति का मीडिया में आया है। ये वही शख्स हैं, जिन्होंने बच्चों को मलबे से निकाला और फिर अस्पताल तक लेकर आए। उन्होंने बताया कि बच्चा-बच्ची बाहर भाग रहे थे। फिर शिक्षक ने डांटकर बच्चों को अंदर कर दिया। इसके बाद छत गिर गई। छत गिरने के बाद बच्चा-बच्ची सारे उसमें दब गए। गांव वाले सभी भागे। ईंट पट्टी जो भी बच्चों के ऊपर गिर गई थी। उसको उठाकर फेंका। स्कूल भवन की शिकायत पांच-छह दिन पहले कर दी थी। छत से पानी टपक रहा था। मास्टर लोगों से शिकायत की थी। शिकायत के बाद भी बच्चों को स्कूल में बैठाया गया। उन्होंने शिकायत आगे नहीं बढ़ाई, वे बोले गांव वाले करेंगे। गांव वाले क्यों भवन ठीक करेंगे। ये काम तो पंचायत वालों का है। ये काम तो सरकार का है। सरकार करेगी न।' ये ऐसा बयान है जो बताता है कि शिक्षकों की लापरवाही की वजह से बच्चों की मौत हुई है।
बच्चों को खतरनाक छत के नीचे बैठाने के जिम्मेदार शिक्षक हैं।अब कलेक्टर झालावाड़ जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौर का बयान भी जानना जरूरी है, क्योंकि एक तरफ गांव वाले स्कूल के भवन की शिकायत कर रहे थे, पर सिस्टम को लगी जंग ने उनकी आवाज न तो शिक्षा विभाग तक पहुंचाई न ही कलेक्टर तक। कलेक्टर अजय सिंह राठौर ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए थे कि ऐसा कोई स्कूल है तो वहां की छुट्टी कर दें। जर्जर भवन की सूचना वाले स्कूलों में भी इस स्कूल का नाम नहीं था। अब इसकी जांच करवाएंगे कि हादसे के क्या कारण हैं। इन तीन बयानों से तस्वीर बिलकुल साफ हो जाती है कि बच्चों की मौत के आरोपी कौन हैं? गांव वाले भवन की शिकायत कर रहे हैं। शिकायत जहां तक पहुंचनी चाहिए, वहां तक पहुंच नहीं रही है। अब हादसे के बाद जब बच्चों की मौत हो गई तब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कह रहे हैं कि 2000 स्कूलों को ठीक किया जा रहा है और हादसे के दोषी वे खुद हैं।
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