दमोह जिले के हटा तहसील के विजवार गांव में भगवान बिहारी जू सरकार 20 साल से पंचायत भवन के एक कमरे में कैद हैं। यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह सच है कि करोड़ों रुपए की संपत्ति के स्वामी भगवान आज इस तरह से भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। जबकि भगवान के नाम पर बैंक में 60 लाख रुपए और 52 एकड़ सिंचित कृषि भूमि है। इतना सब होने के बाद भी भगवान बिहारी जू सरकार पंचायत के एक कमरे में बंद हैं। इसका कारण भगवान का मंदिर न होना है।
ग्रामीणों के अनुसार, सुबह और शाम मात्र आधे घंटे के लिए दरवाजा खुलता है, बाकी समय बंद रहता है। भक्तों को खिड़की से दर्शन और पूजा करनी पड़ती है। ग्रामीणों द्वारा पिछले वर्ष भगवान के मंदिर निर्माण का प्रयास किया गया था, लेकिन कानूनी बाध्यता के चलते मंदिर निर्माण का काम बंद पड़ा है।
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20 साल पहले बाढ़ में ढह गया था मंदिर
वर्ष 2005 में बुंदेलखंड इलाके में आई बाढ़ के दौरान विजवार गांव का मंदिर भी इसकी चपेट में आकर गिर गया था। तब से लेकर अब तक भगवान पंचायत के एक कमरे में विराजमान हैं। मंदिर का संचालन निजी हाथों में था, इसलिए ग्रामीणों ने लंबे समय तक मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा की। लेकिन जब कोई पहल नहीं हुई तो मंदिर की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंप दी गई, जिसके चलते अब मंदिर का संचालन मंदिर की आय से न होकर राजस्व प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।
मंदिर न बनने से ग्रामीणों में रोष
विजवार गांव के लोगों का आरोप है कि मंदिर की 52 एकड़ जमीन और बैंक में लगभग 60 लाख रुपए जमा होने के बावजूद मंदिर का न बन पाना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीण प्रमोद सिंह, केशवेंद्र सिंह, भरत सिंह, भईयन पटेल ने बताया कि जब बाहरी लोग आते हैं और कहते हैं कि भगवान पंचायत के कमरे में बंद क्यों हैं, तो बहुत बुरा लगता है। जबकि मंदिर की कृषि भूमि की नीलामी से प्रतिवर्ष आय होती है। इस वर्ष मंदिर की भूमि की नीलामी से 6 लाख 78 हजार रुपए की आय हुई है।
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मंदिर बनने में यह अड़चन
जानकारी के अनुसार, विजवार गांव में मंदिर का निर्माण 100 वर्ष से अधिक समय पहले एक स्थानीय परिवार द्वारा कराया गया था। कुछ वर्षों पहले मंदिर का संचालन एक अन्य परिवार द्वारा किया गया। बाढ़ में मंदिर गिरने के कुछ वर्षों बाद ग्रामीणों की सहमति से मंदिर संचालन की बागडोर राजस्व प्रशासन, हटा को सौंप दी गई थी। वर्ष 2013 में तत्कालीन विधायक द्वारा भूमि पूजन किया गया था और तत्कालीन एसडीएम, हटा द्वारा मंदिर निर्माण के लिए समिति गठित की गई थी, लेकिन दो पक्षों में विवाद के चलते निर्माण नहीं हो पाया। एक साल पहले तत्कालीन नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार द्वारा दोनों पक्षों में सुलह कराई गई, जिसके बाद अब पूरा गांव एकमत होकर मंदिर निर्माण कराना चाहता है। मंदिर का कार्य एक साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन राशि न निकल पाने के कारण बंद पड़ा है। पिछले वर्ष विजवार पहुंचे हटा विधायक उमादेवी खटीक, नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार, सरपंच सीताराम पटेल सहित पूरे गांव की उपस्थिति में भूमि पूजन किया गया था और निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन निर्माण एजेंसी तय न होने और सक्षम अधिकारी द्वारा स्टीमेट तैयार न होने के चलते कार्य नहीं हो सका। हालांकि, ग्रामीणों की सहमति पर पंचायत द्वारा दो फाइलें तैयार कराई गई हैं ताकि मंदिर की आय से मंदिर का निर्माण पंचायत कर सके।
जल्द शुरू कराएंगे काम
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का कहना है कि तहसीलदार से बात की गई है। मंदिर निर्माण में कुछ तकनीकी समस्याएं आ रही थीं, जिनका शीघ्र ही निराकरण कर मंदिर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।