दमोह के हिण्डोरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले आनु गांव में गेहूं को कीड़ों से बचाने वाली दवा के कारण कई बच्चे गंभीर हो गए। सभी बच्चों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने 5 वर्षीय धर्मेंद्र प्रजापति को मृत घोषित कर दिया। वहीं उसकी 3 वर्षीय बहन रीना, 7 वर्षीय दिनेश और 9 वर्षीय दीपक का पीआईसीयू वार्ड में उपचार जारी है।
गेहूं को कीड़ों से बचाने डाली थी दवा
परिजनों ने बताया कि करीब तीन दिन पहले घर के एक कमरे में 10 बोरी गेहूं रखा गया था। गेहूं को कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए उसमें कीटनाशक दवा डाली गई थी। शुक्रवार रात चारों बच्चे उसी कमरे में सो रहे थे, जहां गेहूं रखा था। देर रात बच्चों को उल्टियां, घबराहट और बेचैनी होने लगी। शुरुआत में परिजन स्थिति को सामान्य समझते रहे, लेकिन सुबह तक हालत गंभीर हो गई।
बांदकपुर से जिला अस्पताल किया गया रेफर
बच्चों की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजन उन्हें तत्काल बांदकपुर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए सभी बच्चों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने धर्मेंद्र प्रजापति को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीन बच्चों को गहन चिकित्सा इकाई (PICU) में भर्ती किया गया।
मां की तबीयत भी बिगड़ी
परिजनों के अनुसार बच्चों की मां को भी उल्टी और घबराहट की शिकायत हुई है। एहतियात के तौर पर उन्हें भी जिला अस्पताल लाया गया, जहां स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सक पूरे परिवार की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
डॉक्टरों की टीम उपचार में जुटी
जिला अस्पताल में डॉ. मधुर चौधरी, डॉ. ललिता, डॉ. राजेश नामदेव और डॉ. सुनील जैन सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बच्चों के उपचार में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही हिण्डोरिया थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्चों की तबीयत वास्तव में कीटनाशक दवा की दुर्गंध से बिगड़ी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी है। जांच के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और बच्चों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
अस्पताल पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम सौरभ गंदर्भ, तहसीलदार रॉबिन जैन और नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने डॉक्टरों से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली तथा परिजनों से चर्चा कर आवश्यक सहायता का भरोसा दिलाया।
पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि उपचाररत बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहे।
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जांच रिपोर्ट के बाद होगा कारणों का खुलासा
फिलहाल प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने और एक बच्चे की मौत का वास्तविक कारण क्या था। गांव में इस घटना के बाद शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।