धरमपुरी तहसील के सिरसोदिया गांव में निजी भूमि पर हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने सख्ती के साथ हटवा दिया। करीब 400 पुलिस जवानों और अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशासन ने पोकलेन मशीनों से अवैध निर्माण को ध्वस्त किया। दो दिन पहले भी राजस्व विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, लेकिन उस दौरान ग्रामीणों ने अचानक पथराव कर दिया था। पथराव में थाना प्रभारी सहित कुछ लोगों को चोटें आई थीं।
नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बाद सोमवार सुबह से ही प्रशासनिक अमला मौके पर जुटना शुरू हो गया था। अतिक्रमण वाले हिस्से में दो मकान बने हुए थे, जिनमें घरेलू सामान रखा था। कार्रवाई शुरू करने से पहले कर्मचारियों ने परिवार की मदद करते हुए चार ट्रैक्टरों के माध्यम से मकान का सामान भरकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया। करीब दो घंटे चली कार्रवाई के बाद अतिक्रमण को पूरी तरह तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान एएसपी विजय डावर, एसडीएम प्रमोद गुर्जर सहित 8 एसडीओपी, 18 थाना प्रभारी और करीब 400 पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
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यह था मामला
धामनोद थाना क्षेत्र के सिरसोदिया गांव में जमीन को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। पटवारी हल्का नंबर 14 के सर्वे नंबर 77, 78, 79 और 80 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में भाजपा विधायक कालूसिंह ठाकुर के परिवार की पल्लवी पति दीपक ठाकुर के नाम दर्ज है। वहीं सर्वे नंबर 99 की जमीन अनिल पिता कांजी, धर्मेंद्र पिता कांजी, अनीता पिता कांजी और ललिता पिता कांजी के नाम दर्ज है।
आरोप है कि सिरसोदिया गांव के संतोष पिता नेवा और निमा बाई पति मोहन भील ने इस जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बना लिया था। 7 मार्च को प्रशासन की टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची थी, तब पथराव हुआ था और एक महिला ने आत्महत्या का प्रयास भी किया था।
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सहमति से हटाया गया सामान
सोमवार सुबह करीब 11 बजे तीन जेसीबी मशीनों की मदद से मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। चार से अधिक ट्रैक्टरों के जरिए मकान का सामान भरकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया। मनावर एसडीएम प्रमोद सिंह गुर्जर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान पूरी तरह शांति व्यवस्था बनी रही और संबंधित व्यक्ति की सहमति से सामान हटवाया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने बताया कि अतिक्रमणकर्ता ने लिखित में दिया था कि वह स्वयं अपना सामान हटाना चाहते हैं। दो दिन पहले हुई पत्थरबाजी की घटना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और अब तक पांच से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर अतिक्रमणकर्ता संतोष का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला और प्रशासन द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई।

पोकलेन से मकान तोड़ते हुए