{"_id":"6a661279ffa9bddd9005089e","slug":"leopard-trapped-in-cage-after-hearing-sound-of-hen-khandwa-news-c-1-1-noi1224-4544350-2026-07-26","type":"video","status":"publish","title_hn":"Khandwa News: मवेशियों और इंसानों पर चार माह से कर रहा था हमला, मुर्गी की आवाज सुन पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Khandwa News: मवेशियों और इंसानों पर चार माह से कर रहा था हमला, मुर्गी की आवाज सुन पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Sun, 26 Jul 2026 08:24 PM IST
Link Copied
खंडवा जिले के तीन गांवों में पिछले चार महीने से दहशत फैलाने वाला खूंखार तेंदुआ आखिरकार रविवार को वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। इस तेंदुए के पकड़े जाने के बाद जिले के खरखेड़ी, काकोड़ा और अंबाखेड़ा के ग्रामीणों ने अब राहत की सांस ली है।
जानकारी के अनुसार जंगल से भटककर आया यह तेंदुआ लगातार इलाके में मवेशियों का शिकार कर रहा था। अब तक यह कई बकरियों को मार चुका था। बीते दिन उसने एक गाय के बछड़े को भी अपना शिकार बनाया था। इसके बाद से इस तेंदुए का हौसला इतना बढ़ गया कि, वह खेतों में काम करने गए ग्रामीणों पर भी हमला करने के लिए दौड़ पड़ता था। आए दिन हो रही घटनाओं से तीनों गांवों में डर का माहौल था। यहां बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे, और किसान अकेले खेतों में नहीं जाते थे।
मुर्गी की आवाज सुन पिंजरे में फंसा तेंदुआ
ग्रामीणों से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद वन विभाग ने चार दिन पहले ही प्रभावित इलाके में पिंजरा लगाया था, लेकिन तेंदुआ सावधान था और पिंजरे के आसपास भी नहीं आ रहा था। इसके बाद बीती रात ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर एक तरकीब निकाली। उनके द्वारा पिंजरे के अंदर चारे के रूप में एक जिंदा मुर्गी रख दी गई। इधर मुर्गी की आवाज सुनकर देर रात तेंदुआ पिंजरे तक पहुंचा और अंदर दाखिल होते ही पिंजरे का दरवाजा बंद हो गया। सुबह ग्रामीणों ने पिंजरे में कैद तेंदुए को देखा तो गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। इसके बाद इस टीम ने तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे सहित अपने कब्जे में ले लिया।
घने जंगल में छोड़ेगी वन विभाग की टीम
वहीं वन अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उसे आबादी से दूर किसी सुरक्षित और घने जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। इधर ग्रामीणों के अनुसार चार महीने से दहशत में जी रहे खरखेड़ी, काकोड़ा और अंबाखेड़ा के लोगों को अब उम्मीद है कि गांव में फिर से पहले जैसी सामान्य दिनचर्या शुरू हो सकेगी।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।