मध्यप्रदेश में खंडवा जिले के आदिवासी अंचल झूमरखली गांव की प्राथमिक शाला में एक ऐसी शिक्षिका हैं, जो विद्यालय की दीवारों पर से बच्चों को ककहरा सिखा रही हैं। उनके किए जा रहे कई सारे नवाचारों के चलते इस प्राथमिक विद्यालय में बच्चे भी खेल-खेल में मन लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं। बता दें कि ये वही शिक्षिका हैं, जो कोरोना काल में जब भय के कारण लोग घरों से बाहर नही निकल रहे थे और उस दौरान आवागमन के साधन और स्कूल भी बंद थे। तब ऐसे माहौल में भी प्राथमिक शिक्षक नीतू ठाकुर ने बच्चों को पढ़ाने के अपने जुनून के चलते स्कूल जाना नहीं छोड़ा था।
कोरोना के समय भी शिक्षिका नीतू किसी तरह अपने स्वयं के साधन से हरसूद शहर से गांव तक रोजाना पहुंचती थीं और बच्चों को नित नए नवाचार कर पढ़ाई से जोड़े रखती थीं। यही नहीं बच्चे भी भयमुक्त होकर पढ़ाई करें, इसके लिए उन्होंने एक टोली अभियान चलाया और बच्चों को घर-घर से स्कूल तक लेकर के आईं और पांच-पांच बच्चों का ग्रुप बनाकर स्कूल में ही पढ़ाई करवाती रहीं। पढ़ाई को लेकर बच्चों की झिझक दूर हो, इसके लिए उन्होंने बगैर खर्च के वेस्ट मटेरियल से शाला भवन के दिवारों के हर कोने में पेंटिंग बनाई, जिसमें जीव जंतु समेत अन्य चीजों की तस्वीरें बनाई, तो वहीं गणित, हिंदी साहित अन्य विषयों से जुड़े चित्रों को दीवारों पर उकेरा, जिनके जरिए वे कोरोना काल में भी पढ़ाई करवाती रहीं और कोरोना काल में भी बच्चे भयमुक्त होकर मन लगाकर पढ़ते रहे।
राज्य स्तर पर किया गया सम्मान के लिए चयनित
खंडवा जिले के हरसूद ब्लॉक के झूमरखाली गांव की प्राथमिक शिक्षिका नीतू ठाकुर के इन्हीं नवाचारों व शिक्षा के प्रति लगन को देखते हुए पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर प्रदेश स्तर पर सम्मान प्राप्त करने हेतु उनका चयन किया गया है, जिसके बाद गुरुवार को भोपाल में उन्हें पुरस्कार के साथ सम्मानित भी किया जाएगा। वहीं, इसको लेकर शिक्षिका नीतू ठाकुर ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई का स्तर कम न हो, इसके लिए अलग-अलग ग्रुप में जाकर बच्चों को वे होमवर्क देती थीं, जिससे कोरोना काल में भी बच्चों ने पढ़ना और उन्होंने पढ़ाना नहीं छोड़ा था। उस दौरान जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे और जो आना ही नहीं चाहते थे, उनके लिए भी उन्होंने जन सहयोग से काम किया।
टोली अभियान चलाकर बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ा
शिक्षिका नीतू ने बताया कि स्कूल को भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए उन्होंने खुद टीएलएम बनाए। कठिन अवधारणाओं को सरल बनाया व टोली अभियान के तहत घर-घर पहुंचकर बच्चों को स्कूल लेकर आईं। ज़ीरो इंवेस्टमेंट में वेस्ट मटेरियल से कार्टून चित्र बनाएं और बच्चों को उन्हीं के माध्यम से पढ़ाया। इसके लिए उन्होंने डाइट में रिसर्च भी किया। वहीं, दो बार शालाओं में गर्म कपड़े बंटवाए। बच्चों के साथ हर साल पौधारोपण भी किया।
राज्य स्तर पर मेरी सुंदर शाला के नाम से हुआ स्कूल रिप्रेजेंट
नीतू ठाकुर ने बताया कि साल भर पहले उनके द्वारा प्रदेश स्तर पर जी-20 प्रदर्शनी में टीएलएम की प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसमें प्रदेश स्तर पर 54 जिलों में हमारा जिला दूसरे नंबर पर था और अब खंडवा का प्राथमिक स्कूल प्रदेश स्तर पर मॉडल बन गया है। यही नहीं प्राथमिक शाला झूमरखली गांव का नाम प्रजेंटेशन में मेरी सुंदर शाला के रूप में प्रजेंट किया गया है। इस प्रजेंटेशन को देखते हुए भोपाल में अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के लिए यह एक मॉडल है। इस तरह की गतिविधियां सभी स्कूलों में होनी चाहिए, जिससे बच्चे भयमुक्त होकर आनंदमयी वातावरण के बीच पढ़ाई कर सकें।
नीतू ठाकुर ने की आदर्श शिक्षक की भूमिका स्थापित
वहीं, इसको लेकर खंडवा जिला शिक्षा अधिकारी पीएस सोलंकी ने बताया कि खंडवा जिले में इस तरह के कई शिक्षक हैं, जो लगातार नवाचार कर रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें नीतू ठाकुर भी हैं, जिनका नाम हमने राज्य स्तर के लिए प्रस्तावित किया था। जो जिला स्तर से संभाग और संभाग से राज्य स्तर के लिए चयनित हुईं। राज्य स्तर और उनका प्रेजेंटेशन हुआ जो पुरस्कार के लिए चयनित हुआ। जो खंडवा जिले के लिए बड़े ही गौरव की बात है। शिक्षिका नीतू ठाकुर ने अपनी स्कूल में भी लगातार नवाचार किया और कोरोना काल में भी बच्चों को भयमुक्त रखते हुए घर-घर जाकर भी उन्हें पढ़ाई करवाई और जो बच्चे स्कूल नहीं जाते थे, उन्हें वे अपनी मेहनत से स्कूल तक ले आईं। इस तरह के नवाचारों से उन्होंने एक आदर्श शिक्षक की भूमिका स्थापित की है।