मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक तीर्थनगरी और आचार्य शंकर की दीक्षा स्थली ओंकारेश्वर में पांच दिवसीय शंकराचार्य प्रकटोत्सव आज से प्रारंभ हो चुका है। इसके शुभारंभ पर यहां सोमवार को प्रातः 7:00 बजे आचार्य शंकर की प्रतिमा एक पालकी में सवार कर, शोभायात्रा के साथ ही कलश यात्रा भी निकाली गई। इस दौरान सैकड़ों भक्त, पुरुष, महिलाएं और संत इसमें शामिल हुए। यह यात्रा संन्यास आश्रम से प्रारंभ होकर जेपी चौक, पुराने पुल से होते हुए ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर और वहां से ओमकार पर्वत पर स्थित एकात्म धाम स्थल पर पहुंची। जहां पर पांच दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस अवसर पर खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री और राज्य मंत्री पर्यटन संस्कृति धार्मिक न्यास और धर्मासु विभाग धर्मेंद्र सिंह लोधी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। बता दें कि इस कार्यक्रम के अंतिम दिवस 2 मई को पंचमी के मुख्य दिवस के अवसर पर जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
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वहीं, आयोजन के पंचम दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं प्रसिद्ध संत अवधेशानंद गिरि जी महाराज भी यहां उपस्थित होंगे। इसके साथ ही प्रतिदिन शंकर संगीत, शंकर विरचित पारायण एवं हवन पूजन के कार्यक्रम संपन्न होंगे। साथ ही संतों के प्रवचन होंगे। बता दें कि ओंकार पर्वत पर स्थित 108 फीट ऊंची बहु धातु की मूर्ति के पास कार्यक्रम स्थल बनाया गया है। यहां पर दक्षिण भारत से आए विद्वानों द्वारा सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जाएंगे। वहीं, ओंकारेश्वर दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास जी त्यागी ने कहा कि संतों द्वारा भी पूरा-पूरा सहयोग इस कार्यक्रम में दिया जाएगा।
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ये है मान्यता
मान्यता है कि आदिगुरु शंकराचार्य जी आठवीं शताब्दी में केरल से बाल्यावस्था में केवल 8 वर्ष की आयु में मां से आज्ञा लेकर ओंकारेश्वर आए थे। उन्होंने यहां नर्मदा जी के तट पर स्थित कोटि तीर्थ घाट पर गुरु गोविंदपाधाचार्य जी से 3 वर्ष तक दीक्षा ग्रहण की थी। यहां सभी वेद पुराणों का अध्ययन किया और कई पुस्तक और ग्रंथ की भी यहां पर उन्होंने रचना की। यहां से पूरे भारत का भ्रमण कर ही चार पीठ भी स्थापित किये और भारत में पुनः सनातन धर्म की पताका फहराई, जिसके बाद अंत में केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के पीछे 32 वर्ष की आयु में समाधि ले ली थी।