सीहोर जिले की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम एक तीखा ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैलाई, बल्कि शहर की पहचान और ऐतिहासिक अस्मिता को लेकर नई बहस भी छेड़ दी। मांग साफ थी कि सीहोर का नाम बदलकर उसके प्राचीन स्वरूप ‘सिद्धपुर’ किया जाए और निर्माणाधीन हाऊसिंग बोर्ड रेलवे ओवरब्रिज को ‘अंबेडकर सेतु’ नाम दिया जाए।
संयुक्त कलेक्टर रवीन्द्र परमार को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस नेताओं ने इसे जनभावनाओं और ऐतिहासिक सम्मान का प्रश्न बताते हुए शीघ्र निर्णय की मांग की। ज्ञापन सौंपने के बाद जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने कहा कि सीहोर का वास्तविक और प्राचीन नाम सिद्धपुर रहा है। उन्होंने दावा किया कि समय के साथ किन्हीं प्रशासनिक या ऐतिहासिक कारणों से इसका नाम बदलकर सीहोर कर दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों की भावनाएं आज भी सिद्धपुर नाम से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि “सिद्धपुर नाम हमारी प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शहर की आत्मा को उसका खोया हुआ सम्मान लौटाने का प्रयास है।”शर्मा ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह जनता की वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हुए नाम परिवर्तन की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे।
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अंबेडकर सेतु पर अड़ी कांग्रेस, दिया बड़ा प्रतीकात्मक तर्क
ज्ञापन का दूसरा बड़ा मुद्दा निर्माणाधीन हाऊसिंग बोर्ड रेलवे ओवरब्रिज का नामकरण रहा। कांग्रेस ने मांग की कि इस ओवरब्रिज का नाम ‘अंबेडकर सेतु’ रखा जाए।
पंकज शर्मा ने इस मांग के पीछे भावनात्मक और वैचारिक तर्क रखते हुए कहा कि जिस प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समाज के हर वर्ग, जाति और समुदाय को एक सूत्र में पिरोकर देश को जोड़ा, उसी प्रकार यह रेलवे ओवरब्रिज शहर के दो हिस्सों को जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि यह नामकरण सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और संविधानिक मूल्यों का प्रतीक होगा। कांग्रेस ने इसे शहर के लिए ऐतिहासिक संदेश बताया।
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घोषणाओं का ढेर, जमीन पर सन्नाटा’...नगरपालिका पर गंभीर सवाल
ज्ञापन में कांग्रेस ने नगरपालिका परिषद और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पूर्व और वर्तमान परिषद ने शहर के कई चौराहों और मंडी रेलवे ओवरब्रिज के नामकरण की घोषणाएं तो बड़े मंचों से कीं, लेकिन आज तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देवी-देवताओं, महान विभूतियों और क्रांतिकारियों के नाम पर चौराहों के नामकरण की घोषणाएं अब तक सिर्फ कागजी वादे बनकर रह गई हैं। पंकज शर्मा ने इसे जनता के साथ छल बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन में इच्छाशक्ति होती, तो अब तक यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी होती। सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए घोषणाएं करना जनता की भावनाओं से खिलवाड़ है।
जनप्रतिनिधियों से दलगत राजनीति छोड़ साथ आने की अपील
कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर बताते हुए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों से समर्थन मांगा है। पंकज शर्मा ने अपील की कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि शहर की अस्मिता, पहचान और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग एक मंच पर आएं, तो यह मांग जल्द पूरी हो सकती है। ज्ञापन सौंपने के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सक्रिय मौजूदगी ने इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदल दिया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से विकास राय, बिजेंद्र ठाकुर, राहुल, ऋतिक विश्वकर्मा, ब्रह्मसिंह, ऋषि विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, धीरज शर्मा, विशाल यादव और जितेंद्र ठाकुर सहित कई कांग्रेसजन मौजूद रहे।