मध्य प्रदेश के सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस रीवा ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए भू-अर्जन शाखा में पदस्थ कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि आरोपी के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुकी थी, और अब दूसरी बार ट्रैप में पकड़े जाने से विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है।
ग्राम सदना ने रहने वाले शिवबहोर तिवारी ने लोकायुक्त को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी नौ डिसमिल जमीन हाईवे परियोजना में प्रभावित हुई थी, जिसके बदले उन्हें कुल 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि इस मुआवजा राशि को जारी कराने के लिए कर्मचारी द्वारा 13 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने मजबूरी में पहले 1 लाख रुपये की राशि दी थी। इसके बाद तय योजना के तहत वे गुरुवार को दूसरी किस्त के रूप में 1 लाख रुपये देने पहुंचे, जबकि शेष राशि पांच दिन बाद देने की बात कही गई थी। इसी दौरान उन्होंने पूरे मामले की शिकायत लोकायुक्त एसपी से की, जिसके बाद सत्यापन कर ट्रैप की रणनीति बनाई गई।
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सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल
लोकायुक्त टीम को मिली सूचना का पहले विधिवत सत्यापन किया गया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने तत्काल उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई, ताकि प्रकरण न्यायालय में मजबूत रहे।
लोकायुक्त थाना प्रभारी एसआर मरावी ने जानकारी देते हुए बताया कि टीम को शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले का सत्यापन किया गया था। सत्यापन में तथ्य सही पाए जाने पर गुरुवार को आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।