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Ujjain News: Baba Mahakal Adorned with Bhang Shringar, Devotees Witness Bhasma Aarti
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Ujjain News: भांग के शृंगार से सजे बाबा महाकाल, भस्म रमाकर भक्तों को दिए दर्शन, होली पर बदलेगी मंदिर व्यवस्था
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Thu, 26 Feb 2026 08:04 AM IST
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फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर आज सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार मे हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। इस दौरान भक्तों ने देर रात से ही लाइन मे लगकर अपने ईष्ट देव बाबा महाकाल के दर्शन किए। आज बाबा महाकाल भी भक्तो को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे। जिनका भस्म रमाकर आकर्षक शृंगार किया गया। भक्तो ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर मे फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर आज गुरुवार सुबह 4 बजे भस्म आरती हुई। इस दौरान वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुलते ही पण्डे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया। जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।
पुजारियों और पुरोहितों ने इस दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप मे शृंगार कर कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया, जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई और फिर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। आज के शृंगार की विशेषता यह थी कि आज बाबा महाकाल का त्रिपुंड, चन्द्रमा और बेल पत्र के साथ ही त्रिनेत्र से भांग का शृंगार कर बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। आज बाबा महाकाल के त्रिनेत्र स्वरूप के दर्शनों का लाभ हजारो भक्तों ने लिया और जय श्री महाकाल का जयघोष भी किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार स्वरूप मे दर्शन देते हैं।
चंद्रग्रहण के चलते श्री महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था में बदलाव
3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा) को श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन परंपरा अनुसार चंद्रग्रहण के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर की पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शाम 6:32 से 6:46 तक रहने वाले इस 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के पश्चात भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।
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