सीधी जिले के मझौली जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंजारी में स्कूल तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध हो गया, जिसके बाद शिक्षकों ने सड़क पर ही कक्षाएं लगा दीं। कक्षाओं के संचालन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि बच्चों को सड़क पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस
शुक्रवार की रात करीब 12 बजे जारी आदेश में जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र सीधी ने प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेश कुमार द्विवेदी तथा माध्यमिक शिक्षक रामदत्त पनिका को कारण बताओ पत्र जारी किया है।
नोटिस में क्या कहा गया है?
नोटिस में कहा गया है कि विद्यालय तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में संबंधित शिक्षकों ने विभागीय अथवा प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्व सूचना दिए बिना बरसात के मौसम में विद्यार्थियों को खुले और असुरक्षित स्थान पर बैठाकर कक्षाएं संचालित कीं। शिक्षा विभाग ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत गंभीर लापरवाही माना है। दोनों शिक्षकों को 13 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सड़क पर लगाई थी कक्षा
गौरतलब है कि, शुक्रवार को विद्यालय तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते भू-स्वामियों द्वारा बंद किए जाने के विरोध में शिक्षकों ने बच्चों को सड़क पर बैठाकर कक्षा संचालित की थी। शिक्षकों का कहना था कि बरसात के दौरान हर वर्ष यही स्थिति बनती है और विद्यालय तक पहुंचने का कोई स्थायी मार्ग नहीं है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए मजबूरी में उन्होंने सड़क पर कक्षा लगाकर विरोध दर्ज कराया।
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सीधी जिले में प्रभारी मंत्री भी थे मौजूद
जिस समय बच्चे सड़क पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय सीधी जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल मझौली और चमराडोल क्षेत्र में सरकारी कार्यक्रमों में शामिल थे। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि विद्यालय तक स्थायी पहुंच मार्ग की मूल समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई केवल शिक्षकों पर होगी या वर्षों से लंबित सड़क निर्माण की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाएगा।