टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग, भोपाल द्वारा उन्हें दूसरा नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले 26 फरवरी को भी विभाग ने उन्हें पद से पृथक करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
पहले नोटिस के जवाब में अब्दुल गफ्फार ने जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध न होने की बात कही थी। इसके बाद विभाग ने दूसरा पत्र जारी करते हुए जांच प्रतिवेदन की छायाप्रति सहपत्रों सहित उपलब्ध कराई है। यह पत्र विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. तोषण कुमार बढ़िए द्वारा जारी किया गया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय सीमा में जवाब अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए, अन्यथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, जांच समिति की रिपोर्ट में नगर पालिका अध्यक्ष पर पद के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये की आर्थिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कुल 9 आरोपों का उल्लेख है, जिनसे नगर पालिका को वित्तीय नुकसान होने की बात कही गई है। इनमें माँ कर्माबाई मार्केट की दुकानों के आवंटन में गड़बड़ी, ऑनलाइन प्रक्रिया के बजाय ऑफलाइन निविदाएं लेना, शासन के प्रतिबंध के बावजूद 15 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती करना शामिल है।
इसके अलावा पुरानी टेहरी क्षेत्र में तालाब के डूब क्षेत्र में संजीवनी क्लीनिक का निर्माण, एलईडी लाइट, फिटकरी और पाइपलाइन विस्तार के लिए सामग्री की खरीद बाजार दर से अधिक कीमतों पर करने जैसे आरोप भी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 66 में से 58 ठेके केवल दो फर्मों मेसर्स तनु इंटरप्राइजेज और मेसर्स महाकाल इंडस्ट्रीज को दिए गए, जिन्हें पिता-पुत्र की कंपनियां बताया जा रहा है।
विभाग का आरोप है कि अध्यक्ष ने अपनी वित्तीय सीमाओं का उल्लंघन करते हुए बिना पीआईसी की स्वीकृति के भुगतान आदेश जारी किए, जो मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 51 का उल्लंघन है।
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वहीं, अब्दुल गफ्फार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उनका कहना है कि नगर पालिका के कुछ अधिकारी कचरा प्रबंधन के नाम पर लगभग 3.30 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान करना चाहते थे, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। इसी कारण उन पर दबाव बनाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कचरे को जबलपुर भेजने के बजाय टीकमगढ़ में ही जला दिया गया और फर्जी चालान के माध्यम से भुगतान की कोशिश की गई। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और आगामी दिनों में विभागीय कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।