गर्मी की शुरुआत के साथ ही महाकालेश्वर मंदिर की परंपरागत दिनचर्या में बदलाव होने जा रहा है। 4 मार्च 2026, बुधवार से बाबा महाकाल का स्नान ठंडे जल से प्रारंभ होगा। इसी दिन से मंदिर में होने वाली प्रमुख आरतियों के समय में भी परिवर्तन लागू किया जाएगा।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से यह परंपरा शुरू की जाएगी। वर्षों से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार मौसम परिवर्तन के साथ भगवान महाकाल के स्नान और आरती के समय में संशोधन किया जाता है।
आरतियों का नया समय
4 मार्च से आरतियों का समय इस प्रकार रहेगा
भस्म आरती: प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक
दधियोदक आरती: प्रातः 7:00 से 7:45 बजे तक
भोग आरती: प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक
संध्या पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे तक
संध्या आरती: सायं 7:00 से 7:45 बजे तक
शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
यह समय-सारणी आश्विन मास की शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगी।
अभी चल रही है शीतकालीन व्यवस्था
वर्तमान में शीतकालीन व्यवस्था लागू है, जिसके तहत पूजन और आरती अपेक्षाकृत पहले की जा रही है तथा भगवान महाकाल का स्नान गर्म जल से कराया जा रहा है। 4 मार्च से ग्रीष्मकालीन व्यवस्था लागू होने के साथ ही ठंडे जल से स्नान शुरू हो जाएगा।
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वैशाख में बांधी जाएंगी 11 मटकियां
मंदिर परंपरा के अनुसार वैशाख मास (अप्रैल) में शिवलिंग को शीतलता प्रदान करने के लिए 11 मटकियां बांधी जाएंगी। इन मटकियों से दिनभर जलधारा प्रवाहित होगी। इनका नाम गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, सरयू, कावेरी, गोदावरी, महानदी, शिप्रा और ब्रह्मपुत्र आदि पवित्र नदियों के नाम पर रखा जाएगा। मान्यता है कि इससे विभिन्न नदियों का जल अर्पित करने का पुण्य प्राप्त होता है और भगवान को ग्रीष्मकाल में शीतलता मिलती है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से नई समय-सारणी के अनुसार दर्शन की योजना बनाने की अपील की है।