शहर के ज्यादातर मंदिरों में देवी-देवताओं के सिंहासन, छत्र और आभूषण बेशकीमती धातुओं से बने हैं। इनकी कीमतें बढ़ने के साथ-साथ अब चोरी का खतरा भी बढ़ गया है। इसी को देखते हुए एसपी प्रदीप शर्मा के निर्देश पर पुलिस ने शहर के ‘धनाढ्य’ मंदिरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है। इन दिनों जिले भर के मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में सुरक्षा इंतजामों की विशेष जांच और निरीक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
महाकाल थाना प्रभारी टीआई गगन बादल ने अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख मंदिरों का दौरा किया। इस दौरान भूखी माता मंदिर, साकेत धाम और कांच के जैन मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। पुलिस ने साफ कहा है कि जो सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं, उन्हें तुरंत चालू किया जाए। साथ ही पुजारियों को सलाह दी गई है कि रात के समय मंदिरों में ज्यादा नकदी या कीमती धातुएं न छोड़ें। मंदिर समितियों से मजबूत दरवाजे, पुख्ता ताले और रात के लिए निजी गार्ड तैनात करने को भी कहा गया है। इसके अलावा चैनल गेट, पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया है।
ये भी पढ़ें- NHAI में कार अटैच कराने का झांसा देकर 50 गाड़ियां हड़पीं, डेढ़ करोड़ की 15 लग्जरी गाड़ियां बरामद
पुलिस सिर्फ निर्देश देकर ही नहीं रुक रही है, बल्कि समाज के जिम्मेदार लोगों के साथ मिलकर सुरक्षा की रणनीति भी बना रही है। सुरजनगर जैन मंदिर और मुल्लापुरा श्रीराम मंदिर जैसे इलाकों में बाकायदा बैठकें की गईं। इन बैठकों में जैन समाज और अन्य मंदिर समितियों को समझाया गया कि सुरक्षा सिर्फ पुलिस के भरोसे नहीं, बल्कि सबकी सतर्कता से ही संभव है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि धार्मिक आस्था के केंद्रों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नजरपुर में हुई थी चोरी
दरअसल, सुरक्षा को लेकर यह सख्ती बेवजह नहीं है। बीते 28 जनवरी को आगर रोड स्थित नजरपुर के प्राचीन माता मंदिर में हुई चोरी की घटना ने पुलिस को अलर्ट कर दिया था। चोर खिड़की के रास्ते घुसे और करीब 16 लाख रुपये की चांदी के छत्र और आभूषण चुरा ले गए। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। अब महाकाल थाना पुलिस खुद मोर्चा संभालते हुए मंदिर प्रबंधकों और पुजारियों के साथ लगातार बैठकें कर रही है, ताकि शहर के मंदिरों की सुरक्षा और मजबूत की जा सके।