उज्जैन के बेगमबाग क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन के लगभग 150 अधिकारी कर्मचारी उज्जैन विकास प्राधिकरण की संपत्ति से कब्जा हटवाने पहुंचे थे। इस कार्यवाही को अंजाम देने पहुंची टीम के पास माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही उज्जैन विकास प्राधिकरण के दस्तावेज भी थे जिसमें इस संपत्ति की लीज को निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया जिससे महाकालेश्वर मंदिर पहुंच मार्ग कुछ देर के लिए अवरुद्ध हो गया।
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उज्जैन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार हरीफाटक ओवर ब्रिज से महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे मार्ग पर उज्जैन विकास प्राधिकरण की बेगमबाग कॉलोनी है जिसे कुछ वर्षों पूर्व एक योजना के तहत लोगों को लीज पर दिया गया था। वर्ष 2014 और 2015 में लीज के नवीनीकरण के दौरान प्राधिकरण के जिम्मेदारों को इस बात की जानकारी लगी थी कि इस क्षेत्र में कुछ लोग लीज की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यहां बिना परमिशन के निर्माण कर लिए हैं तो कुछ ने रहने के लिए दिए गए मकान का उपयोग व्यावसायिक तौर पर करना शुरू कर दिया है।
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इसके बाद लगभग 28 मकानों को चयनित किया गया था जहां लीज की शर्तों का उल्लंघन हो रहा था। डेढ़ साल चली प्रक्रिया के बाद मकानों की लीज को निरस्त कर दिया गया। फिर केस माननीय उच्च न्यायालय पहुंचा। इसके बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट के निर्देश पर कुल तीन संपत्तियों से कब्जा हटाने के लिए पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी बेगमबाग पहुंचे थे। जहां लोगों ने इसका विरोध किया । इस कार्रवाई के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी, एसडीएम एलएन गर्ग और एडिशनल एसपी नितेश भार्गव भी मौके पर मौजूद थे।
लीज निरस्त होने पर मान लिया जाता है अतिक्रमण
उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि जो भी कार्रवाई की जा रही है। वह न्याय सम्मत है। मकान नंबर 49 और 55 का कब्जा हटाया गया। उन्होंने बताया कि उज्जैन विकास प्राधिकरण के नियमों में इस बात का उल्लेख है कि अगर किसी संपत्ति की लीज निरस्त होती है तो फिर उसे अतिक्रमण मान लिया जाता है।