{"_id":"6a3a8c0b5d26cc6065039770","slug":"video-safety-measures-at-tricity-coaching-centers-questioned-many-institutes-lack-emergency-exits-2026-06-23","type":"video","status":"publish","title_hn":"ट्राइसिटी के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, कई संस्थानों में नहीं इमरजेंसी एग्जिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्राइसिटी के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, कई संस्थानों में नहीं इमरजेंसी एग्जिट
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद ट्राइसिटी के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर
गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-34 और पंचकूला के सेक्टर-15 समेत कई क्षेत्रों में संचालित कोचिंग सेंटरों में हजारों
छात्र रोजाना पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या ऐसे संस्थानों की है जहां आपातकालीन निकासी (इमरजेंसी एग्जिट)
की व्यवस्था नहीं है। कई भवनों में छात्रों के आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता है, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में बड़ा
हादसा हो सकता है।
चंडीगढ़ का सेक्टर-34 लंबे समय से शिक्षा हब के रूप में पहचान रखता है। यहां छोटे-बड़े 50 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जहां प्रतिदिन करीब 10 हजार विद्यार्थी आईआईटी-जेईई, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। अधिकांश संस्थान व्यावसायिक भवनों की पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर चल रहे हैं। बड़े कोचिंग सेंटरों में एक कक्षा में 50 से अधिक छात्र मौजूद रहते हैं, जबकि छोटे संस्थानों में भी एक बैच में 25 से 30 विद्यार्थी होते हैं।
छात्रों का कहना है कि अधिकांश कक्षाओं में प्रवेश और निकासी के लिए केवल एक ही दरवाजा है। यही रास्ता अंदर आने और बाहर जाने के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसे में आग लगने, शॉर्ट सर्किट, धुआं भरने या अन्य आपात स्थिति में यह एकमात्र रास्ता बाधित हो गया तो सैकड़ों छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती है। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने कभी किसी मॉक ड्रिल या आपदा प्रबंधन अभ्यास में भाग नहीं लिया।
स्थिति केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है। पंचकूला के सेक्टर-15 और अन्य क्षेत्रों में संचालित कई कोचिंग संस्थानों में भी इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा नहीं है। यहां भी अधिकांश सेंटर पहली और दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक रहती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले संस्थानों में एक अतिरिक्त निकासी मार्ग और नियमित सुरक्षा ऑडिट बेहद जरूरी हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।