शारदीय नवरात्र की पहले दिन बाड़मेर में सोमवार रात्रि को 10 दिवसीय संगीतमय श्री रामलीला का आगाज हुआ। शहर के हाई स्कूल मैदान में पहले दिन भगवान रामचंद्र के जयकारों के साथ रामलीला मंचन प्रारंभ हुआ। जिसमें मंचन के प्रथम दिन कैलाश पर्वत, पार्वती का शिव से राम की कथा सुनाने के लिए निवेदन करना, जंगल दृश्य के साथ ही नारद मोह का मंचन शुरू हुआ।
इसकी शुरुआत नारद मुनि भगवान हरि की तपस्या करने लगते हैं। जिसके कारण भगवान इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र को जब पता चलता है कि नारदजी की तपस्या से उनका सिंहासन हिल रहा है। ऐसे में नारदजी की तपस्या भंग करने के लिए इंद्र देव अप्सराओं को भेजते हैं लेकिन रंभा उर्वशी आदि अप्सराएं भी नारदजी की तपस्या भंग नहीं कर पाती ओर थक हार कर वापस इन्द्र लोक में लौट जाती है।
इसके बाद इंद्र कामदेव को भेजते हैं परंतु कामदेव भी नारदजी की तपस्या को भंग नहीं कर पाते है। इस दौरान नारदजी अपनी तपस्या को स्वयं विराम देते हैं और कामदेव नारदजी को बताते हैं कि आपकी तपस्या से भगवान इन्द्र का सिंहासन हिलने लगा, इसलिए आपकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा था। नारदजी कामदेव को माफ कर देते हैं। इस कारण नारदमुनि को अभिमान आ जाता है। मैंने काम क्रोध जीत लिया। जबकि भगवान शंकर भी क्रोध पर विजय नहीं कर पाए।
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पहले दिन की रामलीला के आखिर में नारद के अभिमान को खत्म करने लिए लिए नारद जी को हरि रूप यानी बंदर का रूप प्रदान किया। जिससे नारदजी क्रोधित हो जाते है और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि आने वाले समय में आप पत्नी के लिए वन-वन भटकेगे, जब यही बंदर आपकी मदद करेंगे। इस दौरान उपस्थित जन समुदाय ने भगवान राम के जयकारे लगाए।
मीडिया प्रवक्ता रमेश कड़ेला ने बताया कि रामलीला में शिव के अभिनय में संजय आचार्य, विष्णु के अभिनय में जय जोशी, पार्वती महेश परमार, गणेश वंश सुखपाल, लक्ष्मी,नारद कार्तिक केला, राजा शील निधि अभिषेक दवे, विष्व मोहिनी और मेनका पृथ्वी, चंद्रप्रकाश, कार्तिकय समर प्रताप सोढ़ा, अग्निदेव ऋषभ गुप्ता, वृहस्पति मोती आचार्य समेत कई कलाकारों में भूमिका निभाई। मेकअप मैन की भूमिका में ललित सोनी,मदन सोनी वस्त्र भंडार दीपक डाबी, व्यास की भूमिका में प्रेम आचार्य पर्दे के पीछे नरेंद्र सिंह आलोक,कोषाध्यक्ष गणेश केला,भवानी प्रकाश रहे।