जिले में दिनभर तपती धूप और गर्म हवाओं के बाद शुक्रवार शाम अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान काले घने बादलों से घिर गया। रेतीले धोरों के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में कुछ ही पलों में ऐसा दृश्य बना मानो किसी पहाड़ी प्रदेश में बर्फबारी हो रही हो।
शाम होते-होते तेज हवाओं के साथ अचानक भारी ओलावृष्टि शुरू हो गई। करीब 20 मिनट तक लगातार गिरे ओलों ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढंक दिया। जहां आमतौर पर तपती रेत नजर आती है, वहां ओलों की मोटी परत जम गई। यह नजारा देखने में बेहद खूबसूरत था और कई लोगों ने इसे रेगिस्तान में कश्मीर जैसा बताया।
लेकिन यह प्राकृतिक दृश्य देखने में जितना आकर्षक दिख रहा था, इसका उतना ही दर्दनाक असर किसानों पर पड़ा। नाचना और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से जीरा और इसबगोल जैसी नकदी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
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किसानों के अनुसार फसलें कटाई के बिल्कुल करीब थीं। कई किसानों ने तो अपनी फसल काटकर खेतों में ही रखी हुई थी लेकिन अचानक आई इस आपदा ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। ओलों की मार और तेज हवाओं के कारण फसलें जमीन पर बिछ गईं और पूरी तरह खराब हो गईं।
इसबगोल की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि यह फसल नमी और ओलों के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। ओलों की तेज चोट और लगातार बारिश के कारण इसकी गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओलों की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में खेत, सड़कें और घरों के आसपास का इलाका सफेद परत से ढंक गया। कई जगहों पर तो ऐसा लग रहा था मानो बर्फ की चादर बिछ गई हो।
मौसम विभाग ने इस स्थिति को देखते हुए जैसलमेर सहित आसपास के इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी तेज आंधी, मेघगर्जन और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
इस अचानक बदले मौसम ने एक बार फिर बता दिया कि प्राकृतिक परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। जहां एक ओर लोगों ने इस अनोखे नजारे को कैमरों में कैद किया, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। अब किसान सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई हो सके।