पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा और गुजरात के लिए एक अच्छी खबर आई है। पश्चिमी राजस्थान नहर परियोजना (W.R.C.P.) को लेकर एक बार फिर उम्मीदें जगी हैं। अगर यह महत्वाकांक्षी परियोजना धरातल पर उतरती है, तो न केवल करोड़ों लोगों को पीने का पानी मिलेगा, बल्कि हजारों हेक्टेयर जमीन को भी सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा।
सिंधु जल संधि पर बनी नई भूमिका
हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। इसके बाद अब जोधपुर में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बयान से इस दिशा में और अधिक संभावनाएं प्रकट हुई हैं। शेखावत ने जोधपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान को जनोपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जल संकट को दूर करने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। जल का आंदोलन आज सच्चे अर्थों में जन-जन का आंदोलन बन चुका है, और इसमें निरंतरता बनी रहनी चाहिए।
जोधपुर में एलिवेटेड रोड का काम जल्द शुरू होगा
शेखावत ने बताया कि जोधपुर में प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड रोड को लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब समयबद्ध तरीके से इसका काम शुरू होगा और समय पर पूरा भी कराया जाएगा। वहीं अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 'जोजरी नदी' को लेकर उन्होंने कहा कि ट्रीटेड वॉटर की पर्याप्त क्षमता विकसित होने के बाद, यह नदी सदा बहती जलधारा के रूप में विकसित की जाएगी। उन्होंने इसे जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए गेम चेंजर करार दिया।
पढ़ें: प्राचीन गणेश मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी, हिंदू संगठनों में रोष; कार्रवाई की मांग
उद्योगों का गंदा पानी अब कच्छ तक जाएगा, ज़मीन होगी उपजाऊ
शेखावत ने बताया कि जोधपुर, बालोतरा और पाली के उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी अब एक पाइपलाइन के माध्यम से कच्छ तक भेजा जाएगा। दो दिन पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस संबंध में चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने सैद्धांतिक सहमति प्रदान की। यह योजना न केवल पर्यावरणीय रूप से हितकारी होगी, बल्कि इससे जमीन की उर्वरता भी सुधरेगी और कुएं पुनर्भरित होंगे। जिससे ग्रामीण जीवन में फिर से खुशहाली लौटेगी।
नदी जोड़ो परियोजना को मिल रहा विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो सपने को आगे बढ़ाते हुए शेखावत ने कहा कि 2014-15 से यह काम प्रारंभ हुआ था। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से रुकी केन-बेतवा परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया है, जिससे लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और एक करोड़ 20 लाख लोगों को स्थायी पेयजल मिलेगा।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का जिक्र
राजस्थान और मध्यप्रदेश की साझा पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर भी उन्होंने बात की। उन्होंने बताया कि पूर्व की सरकार के समय इसे लटकाया गया, जबकि वर्तमान सरकार के आने के 15 दिन के भीतर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाकर इसे फिर से आगे बढ़ाया गया। गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि रावी, व्यास और सतलुज भारत की अधिकारिक नदियां हैं, और सिंधु जल समझौते के तहत इनकी सहायक धाराएं अब भी पाकिस्तान जाती हैं। उन्होंने कहा कि हमने इन नदियों पर व्यापक परियोजनाएं बनाई हैं और सतलुज वॉटर सिस्टम से इन्हें जोड़ने का काम शुरू किया है। प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब पानी और खून एक साथ नहीं बहेगा।