कोटा रेल मंडल के विक्रमगढ़ आलोट और लूणी रांची स्टेशन के बीच 12431 त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग लग गई। आग लगने से बी-1 कोच में सवार 68 यात्रियों की जान आफत में आ गई। हालांकि समय रहते सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और बड़ा हादसा टल गया। इस दौरान कुछ यात्रियों को हल्की चोटें भी आई हैं। घटना के बाद ट्रेन को जैसे-तैसे कोटा के लिए रवाना किया गया लेकिन कोटा पहुंचते ही यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया और लापरवाही के आरोप लगाए।
दरअसल ट्रेन जैसे ही कोटा रेलवे स्टेशन पहुंची, नाराज यात्रियों ने प्लेटफॉर्म पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। यात्रियों का आरोप है कि हादसे के करीब एक घंटे तक न तो रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। इसकी वजह से कोच में रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया। यात्रियों ने बताया कि उन्होंने किसी तरह अपनी और परिवार की जान बचाई। यात्रियों का कहना है कि जिस कोच में उन्हें शिफ्ट किया गया, वह पहले से ही पूरी तरह भरा हुआ था। इसके अलावा एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा था, जिससे पूरे सफर के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ी।
वहीं सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि जिस कोच में आग लगी थी, उसे तुरंत ट्रेन से अलग कर दिया गया। इसके बाद करीब 4 से 5 घंटे की मशक्कत के बाद ट्रेन को डीजल इंजन की मदद से कोटा के लिए रवाना किया गया। उन्होंने बताया कि कोटा रेलवे स्टेशन पर पहले से मेडिकल स्टाफ, रेलवे अधिकारी, आरपीएफ और तकनीकी टीम तैनात थी। यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त कोच और एसएलआर की व्यवस्था भी की गई।
ये भी पढ़ें: Jaipur: खाना खाने के बाद निकले थे वॉक पर, तेज रफ्तार कार ने छीन ली महिला लेक्चरर की जिंदगी, मौके से भागा चालक
सौरभ जैन ने बताया कि कोटा पहुंचने पर अलग किए गए दोनों कोचों को फिर से ट्रेन में जोड़ दिया गया। यात्रियों के लिए आईआरसीटीसी की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई। साथ ही कोटा से दिल्ली तक ट्रेन के साथ आरपीएफ, मेडिकल और तकनीकी स्टाफ भी भेजा गया।
यात्रियों ने कूदकर बचाई जान
ट्रेन में सफर कर रहे यात्री दिलीप और अन्य लोगों ने बताया कि आग लगते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई। धुआं भरने के कारण यात्रियों ने एसी कोच का कांच तोड़ा ताकि धुआं बाहर निकल सके। इसके बाद कई यात्री ट्रेन से कूदकर बाहर आए। जिन यात्रियों के साथ परिवार और बच्चे थे, उनमें दहशत का माहौल था। यात्रियों ने एक-दूसरे की मदद कर परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां राहत और बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना था कि जो अतिरिक्त कोच कोटा से लगाए गए, यदि वही रतलाम से ही लगा दिए जाते तो यात्रियों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।