दमोह में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टर पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी करीब एक साल से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस को आशंका है कि यह सिर्फ तीन लोगों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि फर्जी डिग्री और नियुक्तियों का बड़ा नेटवर्क प्रदेश स्तर तक फैला हो सकता है।
सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट से खुला पूरा मामला
पुलिस के अनुसार 16 मई को सीएमएचओ कार्यालय से कोतवाली थाना पुलिस को एक जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया कि ग्वालियर निवासी कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी राजपाल गौर ने संजीवनी क्लिनिक सुभाष कॉलोनी दमोह में नियुक्ति पाने के लिए फर्जी एवं कूटरचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
दस्तावेजों की जांच के दौरान कई तथ्य संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन में दोनों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
सरकारी अस्पताल में मरीजों का कर रहे थे इलाज
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी करीब एक वर्ष से डॉक्टर बनकर सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई मरीजों का इलाज भी किया। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि समय रहते मामला सामने नहीं आता तो यह फर्जीवाड़ा और लंबे समय तक चलता रहता।
पूछताछ में सामने आया तीसरा आरोपी
दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान जबलपुर में कार्यरत अजय मौर्य का नाम सामने आया। पुलिस को जानकारी मिली कि वह भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संजीवनी अस्पताल में कार्यरत था। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे भी हिरासत में ले लिया। पुलिस अब तीनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उन्हें फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए।
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पैसों के बदले तैयार हो रहे थे फर्जी डॉक्टर
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक पैसों के बदले फर्जी एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी अस्पतालों में नियुक्तियां दिलाई जा रही थीं। पूछताछ में कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि भोपाल स्तर तक कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
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एसपी बोले- पूरे नेटवर्क की होगी जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है, क्योंकि संजीवनी क्लिनिक सीधे आम जनता के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हैं। ऐसे में फर्जी डॉक्टरों का सरकारी अस्पतालों में पदस्थ होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो फर्जी डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज तैयार कराने तथा नियुक्तियां दिलाने में शामिल थे।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(3), 338, 336(3) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।