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Shimla: यूजीसी नियम 2026 और 'रोहित एक्ट' की मांग पर एसएफआई का विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन
शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 04:02 PM IST
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स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) हिमाचल प्रदेश राज्य समिति ने मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में यूजीसी नियम 2026 के क्रियान्वयन और प्रस्तावित कानून का नाम ‘रोहित वेमुला’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मौजूदा प्रावधान अपर्याप्त हैं और इसके लिए एक मजबूत वैधानिक व्यवस्था जरूरी है। एसएफआई राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि यूजीसी और ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन के आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 118 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि संकाय में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व घटकर 6 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि समान अवसर प्रकोष्ठ और एससी/एसटी प्रकोष्ठ जैसी व्यवस्थाएं प्रशासनिक नियंत्रण के कारण प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। संगठन ने मांग की कि यूजीसी नियमों के तहत गठित होने वाले प्रकोष्ठों का गठन लोकतांत्रिक तरीके से किया जाए और उनमें एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग, महिला और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। एसएफआई ने कुलपतियों को इन प्रकोष्ठों का अध्यक्ष बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि वह केवल यूजीसी विनियमों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ‘रोहित एक्ट’ के रूप में एक स्वतंत्र और प्रभावी न्याय प्रणाली की मांग कर रहा है। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्वतंत्र बाहरी समिति के गठन, सामाजिक बहिष्कार और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे मामलों में स्पष्ट आपराधिक प्रावधान, दोषियों के खिलाफ आईपीसी के तहत कार्रवाई, साक्ष्य का भार संस्थानों पर डालने और स्वतः जांच शक्तियों वाले राष्ट्रीय निगरानी आयोग के गठन की मांग दोहराई। जिला अध्यक्ष विवेक नेहरा ने कहा कि दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को विश्वविद्यालयों में बार-बार भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जिनके मामलों का निष्पक्ष निपटारा नहीं हो पाता। एसएफआई ने कहा कि वह हर परिसर में इन नियमों के क्रियान्वयन पर नजर रखेगा और समानता को सुनिश्चित अधिकार बनाने की दिशा में अपना आंदोलन जारी रखेगा।
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