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VIDEO: आगरा कॉलेज में 66 कर्मचारियों की भर्ती में फंसे पांच पूर्व प्राचार्य, प्राथमिकी दर्ज
आगरा कॉलेज में संविदा पर शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। चार साल की जांच के बाद विजिलेंस थाना आगरा सेक्टर में पांच पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज की गई है। संविदा पर भर्ती करने के लिए आरोपी प्राचार्यों ने प्रबंध समिति की अनुमति नहीं ली। समिति के अध्यक्ष प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। भर्तियों के संबंध में साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की गई है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक सौदान सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें आगरा कॉलेज के पांच पूर्व प्राचार्यों को नामजद किया है। इनमें जयपुर हाउस निवासी डॉ. मनोज रावत, दयालबाग निवासी डॉ. अशोक विक्रम सिंह उर्फ एवी सिंह, माधव कुंज निवासी डॉ. उमेशचंद्र शर्मा, प्रोफेसर कालोनी निवासी नरेंद्र सिंह और न्यू आगरा कालोनी निवासी डॉ. अनिल कुमार शामिल हैं। विजिलेंस के मुताबिक, शासन ने वर्ष 2022 में आगरा कॉलेज के इंजीनियरिंग संकाय में हुई शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्तियों के संबंध में खुली जांच के आदेश किए थे। जांच में पाया गया कि पूर्व प्राचार्य डॉ. मनोज रावत ने अपने कार्यकाल में सबसे अधिक 54 भर्तियां कीं। उनके बाद डॉ. एवी सिंह ने 8, डॉ. यूसी शर्मा ने 2, नरेंद्र सिंह ने व संतोष कुमार ने एक-एक कर्मचारी को नियुक्त किया। संतोष कुमार की मृत्यु हो चुकी है। कुल 66 शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अनियमित रूप से संविदा पर रखा। इन भर्तियों के संबंध में कोई पत्रावली भी कॉलेज में उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि इन नियुक्तियों के लिए प्रबंध समिति से अनुमोदन नहीं लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि सात दिसंबर 2017 को हुई प्रबंधन समिति की बैठक में निर्देश दिए गए थे कि जिन कर्मचारियों के पास वैध नियुक्ति पत्र या अनुमोदन नहीं है, उन्हें कार्यमुक्त किया जाएगा। इसके बाद भी कुछ कर्मचारियों को सेवा विस्तार दिया गया। पांच लैब तकनीशियन बिना संविदा के रखे गए।
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