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VIDEO : बलिया में अधिवक्ताओं ने किया आंदोलन का ऐलान, कई मुकदमों को बिना सुनवाई निरस्त किए जाने का आरोप
एक बार फिर तहसील बार एसोसिएशन बैरिया के अधिवक्ताओं ने सोमवार से आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उपजिलाधिकारी की ओर से कई मुकदमों को बिना सुनवाई निरस्त किए जाने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने पहले बैठक की। फिर सर्वसम्मति से आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया की 29 मार्च को न्यायालय की सुनवाई हुई ही नहीं। कई मुकदमों को निरस्त कर दिया गया। पूर्व की हमारी समस्याओं का समाधान करने का मौजूदा उप जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया था। इसके बाद अधिवक्ता न्यायिक कार्य में सहयोग करने लगे थे। पूर्व की समस्याओं का निस्तारण तो अलग बात है। बिना सुनवाई के ही मुकदमों को निरस्त किया जाना न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन है।
न्यायालय से मुकदमों की फाइल गायब होने, मुकदमों के आदेश को कंप्यूटर पर दर्ज नहीं करने आदि मामलों को लेकर अधिवक्ता लंबे समय तक हड़ताल पर रहे। इस बीच नए उपजिला अधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने अधिवक्ताओं से वार्ता कर समस्याओं के समाधान के लिए कुछ समय देने की मांग की थी। इससे अधिवक्ता 24 मार्च से अपना आंदोलन स्थगित कर न्यायिक कार्य में सहयोग करने लगे थे। 12वें दिन ही अधिवक्ताओं का आक्रोश फिर फूट पड़ा। रुद्रदेव कुंवर, देवेंद्र मिश्र, बसंत कुमार पांडेय, चंद्रशेखर यादव, राम प्रकाश सिंह ने बताया कि उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में प्रशासनिक व न्यायिक दो मजिस्ट्रेट मुकदमों की सुनवाई करते हैं। अगर न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद खाली है तो बिना जिलाधिकारी के आदेश के प्रशासनिक मजिस्ट्रेट, न्यायिक मजिस्ट्रेट के मुकदमों को नहीं देख सकते हैं। हद यह है की 29 मार्च को उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में प्रशासनिक मजिस्ट्रेट भी नहीं बैठे थे। बावजूद कानूनी प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए मुकदमों की फाइलों को निरस्त कर दिया गया। अधिवक्ता सोमवार से आंदोलन करेंगे और न्यायिक कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। इस बाबत उप जिला मजिस्ट्रेट आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के मौखिक आदेश के बाद दोनों न्यायालय को देखा जा रहा था। न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही कुछ मुकदमों को निरस्त किया गया है। इस संबंध में अधिवक्ताओं से वार्ता करने के लिए तैयार हैं।
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