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VIDEO: हर 14 घंटे में बुझ रही एक जिंदगी, हादसों की गिरफ्त में बाराबंकी, आईए देखते हैं क्या कहते हैं डीएम एसपी और एआरटीओ
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VIDEO: हर 14 घंटे में बुझ रही एक जिंदगी, हादसों की गिरफ्त में बाराबंकी, आईए देखते हैं क्या कहते हैं डीएम एसपी और एआरटीओ
पांच हाईवे और करीब 5000 किलोमीटर सड़कों वाले बाराबंकी जिले में सड़क हादसे अब किसी अपवाद की तरह नहीं, बल्कि रोजमर्रा की हकीकत बन चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि जिले में हर 14 घंटे में एक व्यक्ति की जान सड़क पर चली जा रही है। बीते वर्षों में एक साथ 18 लोगों की मौत जैसे हादसे जिले को झकझोर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
आंकड़े डराने वाले हैं। वर्ष 2025 बाराबंकी के लिए सबसे काला साल साबित हुआ, जब पहली बार सड़क हादसों में मौत का आंकड़ा 500 पार कर गया। पूरे साल में 527 लोगों की जान गई। यही वजह है कि बाराबंकी देश के दुर्घटना बाहुल्य 100 जिलों में शामिल है, जबकि उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में मौत के मामलों में जिले को 12वां स्थान मिला है।
हैरानी की बात यह है कि हादसों के कारण भी नए नहीं हैं। ड्रिंक एंड ड्राइव, बिना हेलमेट बाइक चलाना, नाबालिगों के हाथ में वाहन, और तेज रफ्तार यही चार वजहें बार-बार मौत बनकर सामने आ रही हैं।
जागरूकता अभियान चले, चेकिंग हुई, चालान कटे, लेकिन लापरवाही की रफ्तार कम नहीं हुई।
इन्हीं हालात को देखते हुए इस बात एक जनवरी से 31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह में शासन ने भी बाराबंकी पर विशेष फोकस किया है। इस बार अभियान को सख्ती के साथ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का पालन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि नियम तोड़ने वालों के वाहन जब्त किए जाएंगे।
जिला प्रशासन इसे निर्णायक अभियान मान रहा है। बाराबंकी के डीएम शशांक त्रिपाठी का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। एसपी अर्पित विजयवर्गीय के अनुसार हाईवे से लेकर ग्रामीण सड़कों तक सघन चेकिंग होगी और खतरनाक ड्राइविंग पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वहीं एआरटीओ अंकिता शुक्ला ने साफ किया कि बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और नाबालिग चालकों पर इस बार कोई रियायत नहीं मिलेगी।
तो क्या नियमों की सख्ती बाराबंकी की सड़कों को सुरक्षित बना पाएगी, या फिर हर 14 घंटे में एक मौत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
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