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ईरान–इजरायल युद्ध की आंच में तप रहा है चंदौली, VIDEO
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब खाड़ी देशों तक महसूस किया जा रहा है। भले ही भारत से हजारों किमी दूर मिसाइलें गिर रही है लेकिन प्रवासी श्रमिकों के सहारे इसकी धमक चंदौली तक पहुंच रही है। फंसे प्रवासी श्रमिकों के परिवार वाले दुख और अनिश्चय के बीच परेशान हैं। वहीं श्रमिक लगातार वीडियो कालिंग के जरिए युद्ध की भयावहता को दिखा रहे हैं।
धानापुर क्षेत्र के नरौली गांव के कई प्रवासी श्रमिकों ने वहां के हालात को लेकर चिंता जताई है। नरौली निवासी जगन्नाथ के पुत्र प्रकाश कुमार अबू धाबी मे हैं। रविवार को फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि रविवार सुबह लगभग 10 बजे सलाम सिटी कैंप के पास तीन मिसाइलें गिरीं। इसके बाद दोपहर करीब 1:30 बजे फिर धमाके की आवाज सुनाई दी। उन्होंने बताया कि जिस क्षेत्र में मिसाइल गिरी, वह अमेरिकी आर्मी कैंप और सैन्य क्षेत्र के नजदीक है। प्रकाश कुमार पिछले तीन वर्षों से दुबई में रहकर सेफ्टी असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में अबूधाबी एयरपोर्ट के पास ड्यूटी पर तैनात हैं। घटना के समय वह ड्यूटी पर मौजूद थे, जबकि रविवार होने के कारण कई अन्य लोग अवकाश पर थे। इसी गांव के सुरेशचंद्र निषाद के पुत्र रविकांत निषाद इलेक्ट्रिक मैकेनिक के रूप में कार्यरत हैं। रामरतन निषाद के पुत्र सिंधबाज निषाद भी दुबई के सोनपुर कैंप में रहकर सिविल कार्य कर रहे हैं। परिजनों से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी ड्यूटी जुमेरा दुबई आइलैंड क्षेत्र में है, जहां सैन्य कैंप के आसपास दिन और रात दोनों समय मिसाइल गिरने की खबरें मिल रही हैं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े प्रकाश कुमार ने अपने परिवार को भरोसा दिलाया है कि वे सुरक्षित हैं। वहीं अन्य प्रवासी श्रमिकों ने भी अपने परिजनों को अपनी सुरक्षा की जानकारी दी है, लेकिन गांव में चिंता साफ देखी जा सकती है। इसी तरह टांडाकला निवासी राम प्रसाद निषाद, जो पिछले एक साल से दुबई में कार्यरत हैं, ने वहां जारी भारी बमबारी और मिसाइल हमलों का दिल दहला देने वाला आंखों देखा हाल साझा किया है। राम प्रसाद ने फोन पर अपने भतीजे अनिल निषाद को बताया कि स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। उन्होंने बताया, अब तक हमारी आंखों के सामने छह मिसाइलें गिर चुकी हैं। धमाके इतने जोरदार हैं कि धरती कांप जाती है। कई गगनचुंबी इमारतें और महत्वपूर्ण एयरपोर्ट ध्वस्त हो चुके हैं, जिसके कारण हवाई सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। दिन में कमरा और रात में खुले आसमान का सहारा काम-धंधे और कंपनियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। राम प्रसाद के साथ क्षेत्र के सोनबरसा निवासी नीरज निषाद, पूरा गणेश के बचाऊ निषाद, सुरेश निषाद और प्रकाश निषाद सहित कई अन्य साथी वहां फंसे हुए हैं। खौफ का आलम यह है कि ये लोग दिन भर डर के साए में कमरों में दुबके रहते हैं, लेकिन रात होते ही ऊंची इमारतों के गिरने के डर से बाहर निकलकर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।
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