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ललितपुर: पावागिरी में किया गया भगवान पारसनाथ का मस्तिकाभिषेक, हुआ भव्य कार्यक्रम
बुंदेलखंड के प्रसिद्ध जैन सिद्ध क्षेत्र तालबेहट के पावागिरी में मंगलवार को मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया। परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के दूसरे दिन वात्सल्य मूर्ति बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में अयोध्या नगरी में अभिषेक शांतिधारा, गर्भकल्याणक पूजन, हवन के साथ वेदी शुद्धि मंदिर शुद्धि एवं संस्कार संपन्न किये गये। मुनि श्री का पाद पृच्छालन कर शास्त्र भेंट किया गया। मुनि श्री सुव्रतसागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा सिद्धों को नमस्कार, लिखना है समयसार, और याद रखें गुरुओं का उपकाऱ। मनुष्य योनि को प्राप्त करना सौभाग्य की बात है। इस पर्याय को प्राप्त करने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। हम सभी को एक दुर्लभ योनि प्राप्त हुई है। सबसे बड़ा सौभाग्य पावन भारत भूमि पर जन्म लेना है, हमें आर्यावर्त को इण्डिया नहीं भारत बोलना है, क्योंकि भारत को माता का दर्जा प्राप्त है और यह केवल इंसान ही नहीं भगवान को भी पैदा करती है। मुनि श्री ने कहा सम्मेद शिखरजी का छोटा रूप पावागिरि है, यह भी स्वर्णभद्रादि मुनिराजों की निर्वाण भूमि है। जहां धार्मिक अनुष्ठान कर पाषाण को भगवान बनाने के संस्कार करना अति सौभाग्य की बात है। जाने कितने जन्मों के पुण्य का फल है जो तुम्हें यह अवसर मिला है। दोपहर की बेला में 24 माताओं का भव्य जुलूस निकाला गया। जिसमें सबसे आगे डीजे की धार्मिक धुनों पर नृत्य करती 24 अष्टकुमारी एवं महिलाएं, बग्गी में सवार 24 माता-पिता एवं विधिनायक इंद्र हाथी पर सवार चल रहे थे। शोभा यात्रा पावागिरि मंदिर से अयोध्या नगरी पहुंची। जहां विधि विधान के साथ सीमंतनी क्रिया से गोद भराई का कार्यक्रम हुआ। मुनि श्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा की जीवन में कभी अपने बच्चों को बड़ा बनाने का प्रयास मत करना हमेशा भला बनाने के लिए प्रयास करना। उन्होंने संस्मरण सुनाया कि कैसे बच्चे बड़े बनकर परिवार माता-पिता को भूल जाते है और भला बनकर कैसे अपने देश का नाम भारत का नाम रोशन करते है।
सायं काल महाआरती अमृत लाल प्रवीण जैन बंडा परिवार ने की। रात्रि में देवी द्वारा माता का जागरण, मंगल स्नान, श्रृंगार, छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण, महाराजा नाभिराय दरबार, तत्वचर्चा, महारानी महादेवी द्वारा स्वप्न फल जिज्ञासा, एवं महाराजा नाभिराय द्वारा सपनों का फलादेश का सुन्दर प्रस्तुतिकरण किया गया। कार्यक्रम में बा. ब्र. अंशु भैया कोसहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने - कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। विशाल जैन पवा नेआभार किया।
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