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Kapsad Meerut Case Update: अगर मान लिया गया नाबालिग तो पारस के साथ क्या होगा?
Video Published by: पंखुड़ी श्रीवास्तव Updated Thu, 15 Jan 2026 01:34 PM IST
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पारस के पिता योगेश सोम ने हाईस्कूल की मार्कशीट और आधार कार्ड कोर्ट में जमा कराया, जिसके अनुसार पारस की उम्र 18 साल से कम आ रही है। ऐसे में सबकी निगाहें 22 जनवरी पर है, जब इस मामले में कोर्ट में सुनवाई होगी।
दरअसल, कपसाड़ में सुनीता की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी पारस सोम चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद है। पारस के पिता योगेश ने वकीलों के एक पैनल के जरिए एससी-एसटी कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। इसमें दावा किया गया है कि पारस नाबालिग है। बचाव पक्ष ने जज असलम सिद्दीकी के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि पारस को नाबालिग घोषित किया जाए और इस केस को किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित किया जाए।
बचाव पक्ष ने उम्र की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज कोर्ट में जमा कराए हैं। इनमें उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट, आदर्श इंटर कॉलेज कपसाड़ का 2022 का आईकार्ड और उसका आधार कार्ड शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों के अनुसार परिजनों ने दावा किया कि पारस सोम की उम्र 18 साल से कम है क्योंकि उसकी जन्मतिथि 11 मई 2008 है और उसने 2024 में 10वीं पास की है।
पारस के परिजनों ने इस केस की पैरवी के लिए वकीलों का एक पूरा पैनल तैयार किया है। इसमें सुनील शर्मा, संजीव राणा उर्फ संजू, विजय शर्मा और बलराम सोम शामिल हैं।अधिवक्ता बलराम सोम और संजीव राणा ने बताया कि उन्होंने जिला कारागार में जाकर पारस सोम से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी ली। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजीव राणा उर्फ संजू राणा ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया यदि कोर्ट पारस को नाबालिग घोषित कर देती है तो यह केस सामान्य अदालत से हटकर किशोर न्याय बोर्ड में चला जाएगा। ऐसे मामलों में आरोपी को जेल के बजाय बाल संप्रेक्षण गृह भेजा जाता है, जहां उसे अपराधी की तरह नहीं बल्कि सुधार की दृष्टि से रखा जाता है। यदि सारे सबूत आरोपी के खिलाफ भी होते हैं तो भी जुवेनाइल एक्ट के तहत अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है, जिसमें कई तरह की छूट भी मिल सकती है।
पारस सोम का आधार कार्ड और हाईस्कूल के प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दस्तावेज फैलाने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस बीच पारस और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की भी बात कही जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाह या निजी जानकारी साझा न करें।
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