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VIDEO : श्रावस्ती: राप्ती के सिसवारा घाट पर बना पुल तो नदी ने मोड़ ली धारा, लोगों को अभी भी लेना पड़ रहा नाव का सहारा
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VIDEO : श्रावस्ती: राप्ती के सिसवारा घाट पर बना पुल तो नदी ने मोड़ ली धारा, लोगों को अभी भी लेना पड़ रहा नाव का सहारा
राप्ती नदी के सिसवारा घाट पर पुल निर्माण का काम अब पूरा होने को है। इससे पहले कि लोग इस पुल का सहारा लें राप्ती ने अपनी धारा ही बदल दिया। अब नदी पुल से करीब 200 मीटर दूर जा चुकी है। इससे नदी पार करने के लिए लोगों को पुन: नाव का ही सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल क्षेत्रवासियों के लिए सफेद हाथी बन चुका है।
गिलौला विकास क्षेत्र को मुख्यालय भिनगा से सीधा जोड़ने में राप्ती नदी बाधक बनी हुई है। बरसात के दिनों में नदी पार बसे करीब 50 गांव के लोग जिला व ब्लाक मुख्यालय आने जाने के लिए 25 से 50 किलोमीटर चक्कर लगाने को विवश रहते हैं। इतना ही नहीं नदी के तट पर बसे कई गांव में लोगों के खेत नदी पार पड़ते हैं। इससे उन्हें प्रत्येक मौसम में खेती किसानी के काम के लिए नाव का ही सहारा रहता है।
इस समस्या से निजात के लिए श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय के प्रस्ताव शासन ने 275 मीटर पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए 51 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। साथ ही इसके लिए सेतु निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया था। इस पैसे से 37 करोड़ 75 लाख की लागत से पुल निर्माण व 12 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से पुल के एक तरफ 1500 मीटर व दूसरी तरफ 500 मीटर अप्रोच का निर्माण होना था। अब जब पुल के सभी दस पिलर का निर्माण पूरा हो चुकी है और अंतिम पिलर पर स्लेप पड़ चुकी है तथा रेलिंग का निर्माण कराया जा रहा है। तब विगत दिनों आई बाढ़ में राप्ती नदी पुल को छोड़कर करीब 200 मीटर दूर चली गई। वहीं पुल के नीचे व दोनों तरफ नदी ने रेत पाट दिया है। इससे बरसात तक पुल के सहारे नदी पार करने वालों को अब नाव का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्हें पुल से करीब एक किलोमीटर दूर जाकर नाव पर बैठना पड़ता है। नदी द्वारा अपनी धारा मोड़ लेने से जहां क्षेत्रवासियों के लिए पुल सफेद हाथी बन गया है। वहीं करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों की दुश्वारी अब भी बरकरार है।
बांध बनाकर मोड़ी जाएगी नदी की धारा
राज्य सेतु निगम के अवर अभियंता भगवान सिंह ने कहा कि राप्ती नदी के धारा मोड़ लेने के बाद भी पुल निष्प्रयोज्य नहीं होगा। इसके लिए मिट्टी व पत्थर के सहारे बांध का निर्माण कराकर नदी को पुल के नीचे लाया जाएगा। यह कार्य जल्द प्रारंभ होगा। उम्मीद है कि बरसात पूर्व पुल का संचालन प्रारंभ हो जाएगा।
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