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वट सावित्री: पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, बरगद पेड़ के नीचे की पूजा-अर्चना

Thu, 10 Jun 2021 11:06 AM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 10 Jun 2021 11:06 AM IST
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Women celebrates Vat Savitri festival for long life of their husband
वट सावित्री पूजा करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
ज्येष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। महिलाएं ये व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व परिवार की उन्नति के लिए रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करना श्रेयस्कर माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस बार महिलाएं हर्षोल्लास के साथ वट सावित्री व्रत कर बरगद की पूजा करती नजर आईं।


 
Women celebrates Vat Savitri festival for long life of their husband
वट सावित्री पूजा करती महिलाएं - फोटो : ANI
आचार्य बताते हैं कि महिलाओं को सुबह स्नान कर बांस की टोकरी में सप्त धान्य रखकर ब्रह्मा व सावित्री की मूर्ति की स्थापना तथा दूसरी टोकरी में सत्यवान व सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करनी चाहिए। फिर यह टोकरियां वट वृक्ष के नीचे रखकर वृक्ष की जड़ में जल देते हुए सावित्री व सत्यवान की पूजा की जाती है। 
 
Women celebrates Vat Savitri festival for long life of their husband
वट सावित्री पूजा करती महिलाएं - फोटो : ANI
पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाया जाता है। वटवृक्ष के तने पर न्यूनतम सात बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटने से पूजा का संपूर्ण फल मिलता है। 
 
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Women celebrates Vat Savitri festival for long life of their husband
वट सावित्री पूजा करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
इस व्रत के समय महिलाएं सत्यवान और सावित्री के अटूट संबंध की कथा सुनती और सुनाती हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कई जगहों पर पहले की तरह भीड़ तो नहीं दिखी लेकिन महिलाओं ने उत्साह के साथ पूजा अर्चना की।
 
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Women celebrates Vat Savitri festival for long life of their husband
वट सावित्री पूजा करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
इस बार अमावस्या तिथि को रोहिणी नक्षत्र, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, सूर्य एवं चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे। अत: यह व्रत फलदायी होगा। पूजा का समय प्रात: काल से मध्याह्न 12:15 बजे तक है। हिंदू शास्त्रों में वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना गया है। मान्यता के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने पति को इसी वृक्ष के नीचे पुन: जीवित किया था। तभी से इस दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। 
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